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उत्तर प्रदेश जीव खतरा दो अंतिम इटावा

देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान की नमामी गंगे परियोजना के संरक्षण अधिकारी डा.राजीव चौहान बताते है कि जब कभी भी चंबल जैसी नदियो मे डैम का पानी छोडा जाता है । चंबल मे प्रजनन के बाद पैदा हुए घडियाल, मगरमच्छ और कछुए के बच्चे गंदे पानी की भेंट चढ जाते है जिनका प्रतिशत एक अनुमान के अनुसार करीब सत्तर फीसदी के आसपास होता है।
चंबल नदी में घड़ियालों, मगर, डाल्फिन, कछुये के अलावा करीब दौ सौ से अधिक प्रजाति के वन्य जीवों का संरक्षण मिला हुआ है लेकिन सेंचुरी अधिकारी और कर्मी वन्य जीवों के संरक्षण के नाम पर खुद को मजबूत करने में लगे हुये हैं क्योंकि इन पर किसी का कोई दबाव नहीं है।
’चंबल नदी के पानी से तटीय क्षेत्र के खेत पूरी तरह से जलमग्न हैं। खतरे के निशान को करीब 4 मीटर पार कर चुकी चंबल नदी इंसानी तौर पर नुकसान पहुंचा पाने की दशा मे नही होती है क्यो कि इस नदी का प्रभाव रिहायशी इलाके के बजाय पूरी तरह से जंगल यानि बीहडी इलाके से हो करके होता है।
पंचनदा के पास स्थित गांव अनेठा के सुरेंद्र सिंह बताते है कि चंबल नदी के व्यापक जल स्तर का सबसे बडा विहंगम सीन देखने को पंचनदा मे मिल रहा है। जहा पर चंबल के साथ साथ यमुना,क्वारी सिंधु और पहुज नदी का मिलन होता है। इस समय इस इलाके मे करीब 3 से 5 किलोमीटर के दायरे मे जल ही जल का समुद्र नजर आ रहा है। पंचनदा मे चंबल का जल वापस इटावा की ओर लौटने लगता है इस कारण यमुना नदी का जल स्तर बढना शुरू हो जाता है।
इटावा जिले में यमुना, चंबल, क्वारी, सिंध, पहुज, पुरहा, अहनैया, सेंगर और सिरसा कुल नौ नदियां बहती हैं। जिले के आठ विकास खंडों मे बह रही इन नदियों के दोनों ओर करीब 60 गांव बसे हैं । बर्ड सेंचुरी घोषित होने के कारण फिलहाल चंबल नदी में जल यातायात और शिकार प्रतिबंधित है लेकिन यहां नाव के बजाय डोंगियां खूब चलती हैं। अन्य नदियों खासकर पचनद इलाके में लोग सैर सपाटा और पर्यटन के इरादे से रोजाना पहुंचते हैं।
सं प्रदीप
वार्ता
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