Monday, Jan 27 2020 | Time 17:49 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • रोजगारोन्नमुख्य तकनीकी शिक्षा में डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने पर विचार: कंवर पाल
  • इंडिगो का मुनाफा 168 प्रतिशत बढ़ा
  • निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारियों का प्रदर्शन, पुलिस लाठीचार्ज में 12 से अधिक घायल
  • भारत-ब्राजील का आपसी व्यापार 2022 तक 15 अरब डालर का
  • लाल किला पर बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाइए
  • सीएए के खिलाफ राहुल गांधी की युवा आक्रोशित रैली मंगलवार को
  • पूर्वी अफगानिस्तान मेें सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 10 आतंकवादियों की मौत
  • आईआईटी ने आर्टिफिशयल इंटेलीजिन्स को समझाने का सरल किट तैयार किया
  • गोयल का केजरीवाल पर लगातार झूठ बोलने का आरोप, जनता चुनाव में सूपड़ा साफ करेगी
  • मजूमदार शतक के करीब, बंगाल को संभाला
  • शाहीन बाग में पत्रकारों पर माहौल बिगाड़ने का आरोप
  • गुरु नानक देव के दर्शनशास्त्र को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 1-2 फरवरी को
  • महँगा हो सकता है आम, केला, पपीता
  • महँगा हो सकता है आम, केला, पपीता
  • गंगा के प्रति निभाएं अपना कर्तव्य : योगी
राज्य » पंजाब / हरियाणा / हिमाचल


कारगिल जैसी घटना को रोकने के लिए मज़बूत ख़ुफिय़ा नैटवर्क समय की ज़रूरत

चंडीगढ़, 15 दिसंबर(वार्ता)रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कारगिल जैसी किसी अन्य घटना को रोकने के लिए ख़ुफिय़ा नैटवर्क को अधिक मज़बूत करने की ज़रूरत है।
‘लैसंस लर्नट फ्रॉम द कारगिल वॅार एंड देयर इंपलीमैंटेशन’ विषय पर करवाए गए सत्र में हिस्सा लेते हुये रक्षा सचिव (अवकाश प्राप्त )शेखर दत्त ने आज यहां कहा कि हमें केंद्रीय और राज्य स्तर पर ख़ुफिय़ा और निगरानी प्रणाली को मज़बूत करने की ज़रूरत है।
लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस.चीमा और एयर मार्शल निर्दोष त्यागी समेत सभी पैनलिस्टों ने कारगिल जैसी अचानक घटने वाली को घटनाओं से बचने के लिए अधिक से अधिक ख़ुफिय़ा संगठन बनाने और विकसित करने पर ज़ोर दिया।
विचार-विमर्श में हिस्सा लेते हुये दत्त ने कहा कि कारगिल ने भारतीय फ़ौज को अचंभे में डाल दिया था कि हमारी सीमा के अंदर घुसपैठिए कैसे आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को टालने के लिए हमें ख़ुफिय़ा तंत्र और निगरानी के सांझे रास्ते विकसित करने पड़ेंगे जिससे अधिक से अधिक तैयारी को यकीनी बनाने हेतु हमारे सुरक्षा बलों को कार्यवाही करने योग्य जानकारी मुहैया करवाई जा सके।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा देश के लिए सबसे अधिक प्राथमिकता देने वाला और बुनियादी ढांचे की अपेक्षा कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण मसला है। इसलिए ख़ुफिय़ा प्रणाली को मज़बूत करने और इस मंतव्य के लिए सुरक्षा बलों के ऑपरेशन कमांडर को हर संदिग्ध गतिविधि से निपटने के लिए ज़रुरी साजो-समान की खरीद के लिए और ज्य़ादा बजट मंज़ूर करने की ज़रूरत है।
एयर मार्शल त्यागी ने कारगिल जंग के वायु सेना के हमले की दो वीडियों प्रदर्शित की जिनमें उन्होंने खुलासा किया कि वायु सेना इतनी ऊँचाई पर ऑपरेशन करने के लिए उचित रूप में शिक्षित और हथियारों से लैस नहीं थी और हमारे लड़ाकू जहाज़(जैटस) भी कारगिल जैसी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं किये गए थे।
उन्होंने कहा कि कारगिल समीक्षा कमेटी ने बताया कि हालात का सही स्तर तक मूल्यांकन करने के लिए फ़ौज ने बहुत लंबा समय लगा दिया, फिर जाकर एहसास हुआ कि स्थिति कितनी गंभीर है और ऑपरेशन को बुरी तरह प्रभावित करती है और एलओसी को पार न करने की रोक के कारण काम और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। यदि एलओसी पार करने की पाबंदी न होती तो कारगिल की लड़ाई 15 से 20 दिन पहले ख़त्म होनी थी।
उन्होंने कहा कि कारगिल की लड़ाई ने दिखा दिया कि वायु ताकत को इस तरह की ऊँचाई पर प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है और यह भी पता लगा है कि फ़ौज के उचित प्रयोग और फ़ौज और वायु सेना के आपसी तालमेल से कम जानी नुकसान और ज़मीनी कार्यवाही को सफल बनाया जा सकता है।
शर्मा
वार्ता
image