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पंजाब विधानसभा में सीएए कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित

चंडीगढ़, 17 जनवरी (वार्ता)पंजाब विधानसभा में विवादित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ सरकार की ओर से लाया गया प्रस्ताव पारित कर दिया और केन्द्र से इस असंवैधानिक कानून को रद्द करने की अपील की ।
सीएए को विघटनकारी , पक्षपातपूर्ण और संविधान के धर्म निरपेक्ष ढांचे को तहस-नहस करने वाला कानून बताते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस कानून की तुलना जर्मनी में हिटलर द्वारा ख़ास तबके के किये सफाये से की ।
सदन में प्रस्ताव पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि स्पष्ट तौर पर इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा गया । उन्होंने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर (एन.पी.आर.) से सम्बन्धित फॉर्मों /दस्तावेज़ों में आवश्यक संशोधन किये जाने तक इसका काम रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आंशका व्यक्त की जा रही है कि यह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का आधार है और एक वर्ग को भारतीय नागरिकता से वंचित कर देने और सी.ए.ए. को अमल में लाने के लिए इसे तैयार किया गया है।
इस प्रस्ताव को संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिन्द्रा ने सदन में पेश किया । प्रस्ताव में कहा गया कि मुसलमानों और यहूदियों जैसे अन्य भाईचारों को सी.ए.ए. के अंतर्गत नागरिकता देने की व्यवस्था नहीं है। प्रस्ताव के जरिये धार्मिक आधार पर नागरिकता देने में निष्पक्षता और सभी धार्मिक समूहों की कानून के समक्ष समानता यकीनी बनाने के लिए इस एक्ट को रद्द करने के लिए कहा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनकी बदकिस्मती है कि अपने जीवन में ऐसा समय देखना पड़ रहा है। जर्मनी में 1930 में जो कुछ हिटलर के शासन में घटा था, वही कुछ अब भारत में घट रहा है। उस समय पर जर्मनी के लोग बोले नहीं थे और बाद में उनको पछताना पड़ा लेकिन हमें अब आवाज़ बुलंद करनी चाहिए ताकि बाद में पछताना न पड़े।
कैप्टन सिंह ने कहा कि देश में जो हो रहा है, वह ठीक नहीं है। देश में इसके खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनकी अगुवाई पढ़े लिखे नौजवान कर रहे हैं। अकालियों को राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के समर्थन में मत देने से पहले अपने देश के बारे में सोच लेना चाहिए। वह कभी इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में ऐसा दुखांत घटेगा जहाँ मुसलमानों की संख्या पाकिस्तान से अधिक है।
सदन के नेता ने कहा कि वे लोग कहाँ जाएंगे जिनको आप ग़ैर-नागरिक मानते हो। असम में ग़ैर कानूनी घोषित किए गए 18 लाख लोग कहाँ जाएंगे यदि उनको किसी अन्य मुल्क ने पनाह देने से मना कर दिया । गरीब लोग जन्म प्रमाण पत्र कहाँ से लेंगे। सभी को अपने हित के लिए धर्म निरपेक्ष भारत के नागरिकों के तौर पर इकठ्ठा रहना पड़ेगा।
कैप्टन सिंह ने कहा कि सभी धर्मों के लोग इस देश में सालों से एकजुट होकर रह रहे हैं और मुसलमानों ने इस देश के लिए अपना जानें कुर्बान की हैं। उन्होंने अन्यों समेत भारतीय सेना के सिपाही अब्दुल हमीद की मिसाल दी जिसको 1965 में भारत-पाकिस्तान जंग में दिखाई बहादुरी के बदले मरने के उपरांत परमवीर चक्र के साथ सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि अंडमान की सेलुलर जेल में मुसलमानों की बड़ी संख्या थी।
उन्होंने कहा कि इसमें मुसलमानों को क्यों बाहर रखा गया तथा सी.ए.ए. में यहूदियों को क्यों नहीं शामिल किया। उन्होंने कहा कि पंजाब के राज्यपाल रहे जनरल जैकब यहूदी थे जिन्होंने देश के लिए 1971 की जंग लड़ी।
उन्होंने अकाली दल पर बरसते हुए कहा कि उन्होंने संसद में तो इस बिल की हिमायत कर दी और फिर अपने राजसी एजंडे को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग विचार प्रकट करने लग गए।
हाल ही में गुरु नानक देव जी के मनाए गए 550वें प्रकाश पर्व का जि़क्र करते हुए कहा गुरू साहिब ने भी यही संदेश दिया था कि सब मानव एक हैं। उन्होंने अकालियों को नसीहत दी कि क्या वह गुरू साहिब की शिक्षाएं भूल गए। आपको शर्म आनी चाहिए और आप एक दिन पछताओगे।
इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान अकाली दल तथा सत्तापक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई । अकाली दल विधायक दल के नेता शरनजीत ढिल्लों ने विस अध्यक्ष से आग्रह किया कि यदि इस प्रस्ताव में मुसलमानों को शामिल किया जाये तो वह सरकार के इस प्रस्ताव का समर्थन करने को तैयार हैं ।
आम आदमी पार्टी के सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुये ऐसे कानूनों को अनावश्यक और गैर जरूरी बताते हुए देश को संप्रदायवाद के आधार पर बांटने और संविधान विरोधी कदम करार दिया।
प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने सीएए/एनआरसी का विरोध और पंजाब सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम संविधान के विरुद्ध है। ऐसे अनावश्यक और लोगों में दरार डालने वाले कानूनों के द्वारा केंद्रीय की भाजपा सरकार अल्पसंख्यकों और दलितों-गरीबों में डर और सहम का माहौल पैदा कर रही है। इस मौके उन्होंने दिल्ली में डीडीए की ओर से श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़े जाने की दलित विरोधी कार्यवाही की मिसाल दी।
श्री चीमा ने सीएए /एनआरसी /एनआरपी का विरोध करने वाले जेएनयू और अन्य यूनिवर्सिटियां कालेजों के छात्रों पर फासीवादी हमलों के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लाये जाने की मांग की।
लोक इंसाफ पार्टी ने भी सरकार का समर्थन किया । अकाली -भाजपा गठबंधन के विरोध के बीच सदन में यह प्रस्ताव पारित हो गया ।
ज्ञातव्य है कि पंजाब देश के कांग्रेस शासित राज्यों में से पहला ऐसा राज्य है जिसने सीएए के खिलाफ सदन में प्रस्ताव पारित कर इसका विरोध किया । इससे पहले कम्युनिस्ट राज्य केरल भी इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को अपना विरोध जता चुका है।
शर्मा
वार्ता
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