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संगीतकार खय्याम सुपुर्द-ए-खाक

मुंबई, 20 अगस्त (वार्ता) मशहूर संगीतकार मोहम्मद जहूर खय्याम के पार्थिव शरीर को मुंबई के पश्चिमी उपनगर अंधेरी स्थित चार बंगला कब्रिस्तान में आज शाम पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए- खाक कर दिया गया।
तलत अजीज और सोनू निगम ने उनके जनाजे को कंधा दिया तथा इस दौरान संगीतकार आनंदजी, गीतकार इरशाद कामिल, गायक नितिन मुकेश, संगीतकार उत्तम सिंह भी मौजूद थे।
सुबह से ही श्री खय्याम के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। नायिका पूनम ढिल्लन, अभिनेता रजा मुराद, गायक सोनू निगम, विशाल भरद्वाज और गुलज़ार के अलावा कई अन्य हस्तियां उनके निवास स्थान पर पहुंचे थे।
प्रसिद्ध संगीतकार मोहम्मद जहूर हाशमी (खय्याम) का कल देर रात 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। वे पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। सांस लेने में तकलीफ के कारण पिछले सप्ताह अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
गौरतलब है कि पद्मविभूषण खय्याम 'उमराव जान', 'बाजार', 'कभी-कभी', 'नूरी', 'त्रिशूल' जैसी फिल्मों में संगीत दिया है। खय्याम ने अपने संगीत के करियर की शुरुआत लुधियाना में 1943 में 17 वर्ष की आयु में की थी।
उन्हें साल 2007 में संगीत नाटक एकेडमी अवॉर्ड मिला। 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
श्री खय्याम ने पहली बार फिल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली। फिल्म 'शोला और शबनम' ने उन्हें संगीतकार के रूप में स्थापित कर दिया। खय्याम ने कई हिट फिल्मों जैसे 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' के सदाबहार गीतों के लिए लिए संगीत दिया था।
उन्होंने अपने चार दशक लंबे कैरियर में कई यादगार संगीत दिये। उन्हें 1977 में 'कभी-कभी' और 1982 में 'उमराव जान' के लिए श्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2010 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा साल 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी, पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2011 में उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया।
श्री खय्याम के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, महानायक अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, अनुपम खेर, जाने-माने लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने दुख व्यक्त किया है।
त्रिपाठी.श्रवण
वार्ता
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