Sunday, Jul 21 2019 | Time 16:03 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • पैरोल जंप करने वाला ‘मोस्ट वांटेड‘ बदमाश पकड़ा गया
  • अमेरिका में लू से छह लोगों की मौत, करोड़ों प्रभावित
  • विश्व में खसरे से प्रति घंटे दस बच्चों की होती है मौत
  • विराट को तीनों फार्मेट की कप्तानी, हार्दिक को विश्राम
  • सादगी की मिसाल राय दा ने आजीवन पेंशन नहीं ली
  • सिरसा मेंं कांग्रेस नेताओं ने दी शीला दीक्षित को श्रद्धाजंलि
  • सिंधू का 2019 में अपने पहले खिताब का सपना टूटा
  • खाद्य तेलों पर दबाव: गेहूँ, दाल में उबाल, गुड़ नरम
  • ममता का मतपत्रों का इस्तेमाल दोबारा शुरू करने का आह्वान
मनोरंजन


संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

संगीतबद्ध गीतों से देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया सलिल ने

..पुण्यतिथि 5 सितंबर के अवसर पर..

मुंबई 04 सितंबर(वार्ता) भारतीय सिने जगत में सलिल चौधरी का नाम एक ऐसे संगीतकार के रूप मे याद किया जाता है जिन्होंने अपने संगीतबद्ध गीतों से लोगो के बीच देशभक्ति के जज्बे को बुलंद किया।

सलिल का जन्म 19 नवंबर 1923 को हुआ था । उनके पिता ज्ञानेन्द्र चंद्र चौधरी असम में डाक्टर के रूप में काम करते थे । सलिल का ज्यादातर बचपन असम में हीं बीता । बचपन के दिनों से ही सलिल का रूझान संगीत की ओर था। वह संगीतकार बनना चाहते थे। उन्होंने किसी उस्ताद से संगीत की शिक्षा नही ली थी । सलिल के बड़े भाई एक आर्केस्ट्रा में काम करते थे और इसी वजह से वह हर तरह के वाध यंत्रों से भली भांति परिचत हो गये। सलिल को बचपन के दिनों से हीं बांसुरी बजाने का बहुत शौक था। इसके अलावा उन्होंने पियानो और वायलिन बजाना भी सीखा।

सलिल ने अपनी स्नातक की शिक्षा कलकत्ता (कोलकाता) के मशहूर बंगावासी कॉलेज से पूरी की। इस बीच वह भारतीय जन नाटय् संघ से जुड़ गये। वर्ष 1940 मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को स्वतंत्र कराने के लिये छिड़ी मुहिम में सलिल चौधरी भी शामिल हो गये और इसके लिये उन्होंने अपने संगीतबद्व गीतों का सहारा लिया। सलिल ने अपने अपने संगीतबद्व गीतों के माध्यम से देशवासियों मे जागृति पैदा की। अपने संगीतबद्व गीतों को गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप मे इस्तेमाल किया और उनके गीतों ने अंग्रेजो के विरूद्व भारतीयों के संघर्ष को एक नयी दिशा दी ।

वर्ष 1943 मे सलिल के संगीतबद्व गीतों ..बिचारपति तोमार बिचार .. और ..धेउ उतचे तारा टूटचे .. ने आजादी के दीवानों में नया जोश भरने का काम किया। अंग्रेज सरकार ने बाद में इस गीत पर प्रतिबंध लगा दिया। पचास के दशक में सलिल ने पूरब और पश्चिम के संगीत का मिश्रण करके अपना अलग हीं अंदाज बनाया जो परंपरागत संगीत से काफी भिन्न था । इस समय तक सलिल पश्चिम बंगाल में बतौर संगीतकार और गीतकार के रूप में अपनी खास पहचान बना चुके थे। वर्ष 1950 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिये वह मुंबई आ गये।

         वर्ष 1950 में विमल राय अपनी फिल्म दो बीघा जमीन के लिये संगीतकार की तलाश कर रहे थे। वह सलिल के संगीत बनाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुये और उन्होंने सलिल से अपनी फिल्म दो बीघा जमीन में संगीत देने की पेशकश की। सलिल ने संगीतकार के रूप में अपना पहला संगीत वर्ष 1952 में प्रदर्शित विमल राय की फिल्म ..दो बीघा जमीन ..के गीत .. आ री आ निंदिया ..के लिये दिया । फिल्म की कामयाबी के बाद सलिल बतौर संगीतकार फिल्मों में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये ।

फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद इसका बंगला संस्करण ..रिक्शावाला .. बनाया गया । वर्ष 1955 में प्रदर्शित इस फिल्म की कहानी और संगीत निर्देशन सलिल ने ही किया था। फिल्म दो बीघा जमीन की सफलता के बाद सलिल विमल राय के चहेते संगीतकार बन गये और इसके बाद विमल राय की फिल्मों के लिये सलिल ने बेमिसाल संगीत देकर उनकी फिल्मो को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।

वर्ष 1960 में प्रदर्शित फिल्म ..काबुलीवाला .. में पार्श्वगायक मन्ना डे की आवाज में सजा यह गीत .. ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझपे दिल कुर्बान .. आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है । सत्तर के दशक में सलिल को मुंबई की चकाचौंध कुछ अजीब सी लगने लगी और वह कोलकाता वापस आ गये। उन्होंने इस बीच कई बंगला गानें लिखे। इनमें सुरेर झरना और तेलेर शीशी श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुये । सलिल के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी गीतकार शैलेन्द्र और गुलजार के साथ खूब जमी। सलिल के पसंदीदा पार्श्वगयिकों में लता मंगेश्कर का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 1958 मे विमल राय की फिल्म ..मधुमति .. के लिये सलिल को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।वर्ष 1998 में संगीत के क्षेत्र मे उनके बहूमूल्य योगदान को देखते हुये वह संगीत नाटय अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये ।

सलिल ने अपने चार दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 75 हिन्दी फिल्मों में संगीत दिया । हिन्दी फिल्मों के अलावा उन्होने मलयालम .तमिल .तेलगू .कन्नड़ .गुजराती .आसामी. उडि़या और मराठी फिल्मों के लिये भी संगीत दिया। लगभग चार दशक तक अपने संगीत के जादू से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले महान संगीतकार सलिल पांच सितंबर 1995 को इस दुनिया को अलविदा कह गये ।

वार्ता

More News
रणबीर के साथ फिर जोड़ी जमायेंगी दीपिका!

रणबीर के साथ फिर जोड़ी जमायेंगी दीपिका!

21 Jul 2019 | 10:32 AM

मुंबई 21 जुलाई (वार्ता) बॉलीवुड की डिंपल गर्ल दीपिका पादुकोण और रॉकस्टार रणबीर कपूर की जोड़ी एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर साथ नजर आ सकती है।

see more..
बॉलीवुड में कमबैक करेंगे राहुल रॉय

बॉलीवुड में कमबैक करेंगे राहुल रॉय

21 Jul 2019 | 10:28 AM

मुंबई 21 जुलाई (वार्ता) जाने माने अभिनेता राहुल रॉय बॉलीवुड में कमबैक करने जा रहे हैं।

see more..
‘जजमेंटल है क्या’ जैसे किरदार से न्याय कर सकती हैं कंगना

‘जजमेंटल है क्या’ जैसे किरदार से न्याय कर सकती हैं कंगना

21 Jul 2019 | 10:21 AM

मुंबई 21 जुलाई (वार्ता) बॉलीवुड में अपने संजीदा अभिनय के लिये मशहूर कंगना रनौत का कहना है कि उन्होंने फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ में जैसा किरदार निभाया है उससे वह आसानी से न्याय कर सकती हैं।

see more..
दिव्या दत्ता को गौर गोपाल दास ने उबारा डिप्रेशन से

दिव्या दत्ता को गौर गोपाल दास ने उबारा डिप्रेशन से

21 Jul 2019 | 7:57 AM

नयी दिल्ली 20 जुलाई (वार्ता) मनमोहक मुस्कान से दर्शकों का दिल जीतने वाली बाॅलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री दिव्या दत्ता को देखकर शायद ही लोगों को एहसास हाे कि वह कभी डिप्रेशन की शिकार भी हुयी होंगी लेकिन उनकी जिन्दगी में एक ऐसा मोड़ आया था जब वह घोर निराशा तथा अवसाद में घिर गयीं थी और तब विश्वविख्यात मोटिवेशनल शख्सियत गौर गोपाल दास के एक वीडियो ने डिप्रेशन के दलदल से उन्हें निकाल कर उनका जीवन बदल दिया।

see more..
गायक बनने की तमन्ना रखते थे आनंद बख्शी

गायक बनने की तमन्ना रखते थे आनंद बख्शी

20 Jul 2019 | 1:23 PM

..जन्मदिवस 21 जुलाई .. मुंबई 20 जुलाई (वार्ता) अपने सदाबहार गीतों से श्रोताओं को दीवाना बनाने वाले बालीवुड के मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लगभग चार दशक तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया लेकिन कम लोगो को पता होगा कि वह गीतकार नहीं बल्कि पार्श्वगायक बनना चाहते थे।

see more..
image