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हाईकोर्ट ने स्वर्गाश्रम गंगा किनारे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण पर मांगा जवाब

नैनीताल, 18 सितम्बर (वार्ता) उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित स्वर्गाश्रम में गंगा तट पर हुए अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार से विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा है।
अदालत ने सरकार को याचिका में उठाये गये सभी बिन्दुओं पर जवाब देने को कहा है। साथ ही सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि अवैध निर्माण किसने किये हैं। दूसरी ओर पौड़ी गढवाल स्थित यमकेश्वर तहसील के उपजिलाधिकारी की ओर से अदालत में ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण के संबंध में जांच रिपोर्ट सौंपी गयी है।
ये जानकारी याचिकाकर्ता अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने दी है। श्री शुक्ला ने कहा कि रिपोर्ट में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की बात स्वीकार की गयी है। वह इस मामले की स्वयं पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी अदालत में रिपोर्ट पेश की गयी और कहा गया कि मौजूद स्थल पर गंगा का प्रदूषण स्तर सामान्य है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में बुधवार को हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से मामले को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गयी है। इस मामले में मुनि चिदानंद को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिककर्ता की ओर से कहा गया है कि स्वर्गाश्रम में गंगा के किनारे परमार्थ निकेतन आश्रम ने सिंचाई विभाग की जमीन पर अतिक्रमण किया है। अतिक्रमित जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। आश्रम द्वारा इस जमीन को व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा है। इससे गंगा नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि गंगा घाट पर सरकारी भूमि पर शिव भगवान की एक मूर्ति स्थापित की गयी है और मूर्ति तक आने-जाने के लिये पुलों का निर्माण किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले की शिकायत स्थानीय लोगों ने जब हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण, सिंचाई विभाग व स्थानीय प्रशासन से की तो इस मामले में कोई कार्यवाही अमल में नहीं लायी गयी।
श्री शुक्ला ने अदालत को यह भी बताया कि इस मामले में निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। गंगा के किनारे 200 मीटर तक किसी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है। अतिक्रमित भूमि सिंचाई विभाग की है और सिंचाई विभाग आंखें मूंदे बैठा है। इस मामले में मुनि चिदानंद, जिलाधिकारी पौड़ी, हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण, जिला विकास प्राधिकरण, पौड़ी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग व उपजिलाधिकारी यमकेश्वर को पक्षकार बनाया गया है और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब देने के निर्देश दिये हैं।
रवीन्द्र, उप्रेती
वार्ता
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