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बिजनेस


मुंबई महानगर क्षेत्र में मकानों की किल्लत

मुंबई, 07 अक्टूबर (वार्ता) मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में किफायती दाम के मकानों की मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है और इस इलाके में एक-तिहाई लोग किराए के मकानों में रहते हैं।
अचल संपत्ति बाजार का अध्यन करने वाली फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया और रियल एस्टेट विकास में लगी कंपनियों के संगठन नरेडको की एक साझा रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा गया है कि इस समय एमएमआर में संगठित क्षेत्र में एक लाख किराएदारी लीज(पट्टा) के समझौते चल रहे हैं। इलाके में असंगठित क्षेत्र का आवास बाजार इससे भी बड़ा है।
नाइट फ्रैंक इंडिया-नरेडको की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएमआर इलाके में झुग्गियों में रहने वाले 35 प्रतिशत लोग किराए पर रह रहे हैं।
रिपोर्ट में सर्वेक्षण के अनुसार कहा गया है कि एमएमआर में किफायती दाम के माकनों की मांग ऊंची है जिसमें 67 प्रतिशत मांग 25 लाख रुपये मूल्य से कम के मकानों की है। इसी तरह 13 प्रतिशत मांग 25-50 लाख रुपये के मकानों की है और 20 प्रतिशत मांग 50 लाख रुपये से ऊपर वाले मकानों की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में डेवलपर कंपनियों ने इलाके में करीब 10 लाख नए मकान विकसित किए। इसके बावजूद मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नए मकानों की आपूर्ति में 50 लाख से ऊपर के मकानों का हिस्सा 44 प्रतिशत रहा उसके बाद 34 प्रतिशत नए मकान 25-50 लाख रुपये मूल्य के दायरे वाले रहे जबकि 25 लाख से कम के मकानों की आपूर्ति का हिस्सा 22 प्रतिशत ही रहा।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंधन निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, “ मुंबई कभी रहने और काम करने के लिए लोगों की पसंद का शहर था लेकिन आज यह बुनियादी सुविधाओं की कमी, घटिया मकानों की समस्या से जूझ रहा है शहर के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुंबईवासियों को आवास सुलभ कराना है। मुंबई के बहुत से लोग या तो शहर के बीच घटिया गुणवत्ता वाले मकानों में या अच्छे मकान के लिए शहर के बाहर के इलाकों में रहने के लिए मजबूर है।”
अभिषेक.श्रवण
वार्ता
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