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‘मंथन’ फिल्म कान्स क्लासिक्स 2024 में प्रदर्शित

‘मंथन’ फिल्म कान्स क्लासिक्स 2024 में प्रदर्शित

आणंद, 18 मई (वार्ता) भारत को दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनाने में ऐतिहासिक ‘मंथन’ फिल्म का बहुत बड़ा योगदान रहा है। इस ‘मंथन’ (पुन:स्थापित) फिल्म को 77वें कान्स (फ़्रांस) फिल्म महोत्सव, कान्स क्लासिक्स 2024 में प्रदर्शित किया जा रहा है।

गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड(जीसीएमएमएफ) की ओर से शनिवार को यहां जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 17 मई की रात कान्स में भारत सरकार के इंडिया पवेलियन में कान्स क्लासिक्स 2024 में ‘रीविज़िटिंग मंथन’ नामक एक सत्र आयोजित किया गया। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू, जीसीएमएमएफ (अमूल) के एमडी डॉ. जयेन मेहता, सुश्री निर्मला कुरियन, फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन के शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर और एल'इमेजिन रिट्रोवाटा(बोलोग्ना) के निदेशक डेविड पॉज़ी ने इस चर्चासत्र में भाग लिया। यह पुनर्स्थापित फिल्म एक जून को विश्व दूध दिवस पर भारत के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

जीसीएमएमएफ (अमूल) के प्रबंध निदेशक डॉ. जयेन मेहता ने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, अभिनेता और दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल के बेटे प्रतीक बब्बर, श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन की बेटी निर्मला कुरियन, स्मिता पाटिल की बहनें डॉ. अनीता पाटिल देशमुख और मान्या पाटिल और इस फिल्म को पुनर्स्थापित करने वाली फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन की टीम के साथ रेड कार्पेट पर ‘मंथन’ टीम का नेतृत्व किया। 36 लाख डेयरी किसानों के स्वामित्व वाली दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था जीसीएमएमएफ (अमूल) ने फिर एक बार आंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी है। जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक डॉ. जयेन मेहता 17 मई की रात 77वें वार्षिक कान्स फिल्म महोत्सव में श्याम बेनेगल की 1976 की ऐतिहासिक फिल्म ‘मंथन’ (पुन:स्थापित) के वर्ल्ड प्रीमियर पर रेड कार्पेट पर चले, जिसे कान्स क्लासिक्स 2024 में प्रदर्शित किया जा रहा है।

डॉ. जयेन मेहता ने इस कार्यक्रम में कहा कि, ‘‘भारत को दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बनने में ‘मंथन’ फिल्म का बहुत बड़ा योगदान है। इस फिल्म के माध्यम से उत्पन्न जागरूकता ने पूरे देश में डेयरी सहकारी आंदोलन को संगठित करने पर बड़ा प्रभाव डाला। यह सहकारी मॉडल आज भी प्रासंगिक बना हुआ है, क्योंकि भारत शायद दुनिया का एकमात्र देश है जिसके पास सहकारिता मंत्रालय है, जिसका दृष्टिकोण सहकारी समितियों के माध्यम से सभी क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित करना है। 1976 में 10 लाख रुपये के बजट में बनी एक फिल्म ने सालाना 10 लाख करोड़ रुपये का दूध उत्पादन मूल्य उत्पन्न करने में अत्याधिक मदद की है।’’

उन्होंने बताया कि इस फिल्म को जीसीएमएमएफ के सहयोग से फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा प्रसाद कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड की पोस्ट - स्टूडियो, चेन्नई और एल'इमेजिन रिट्रोवाटा लेबोरेटरी में पुनर्स्थापित किया गया था। मंथन फिल्म को सर्वोत्तम एनएफडीसी-नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया में संरक्षित 35 मिमी मूल कैमरा नेगेटिव और फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन में संरक्षित 35 मिमी रिलीज प्रिंट के जीवित तत्वों का उपयोग करके पुनर्स्थापित किया गया था। ओरिजिनल कैमरा नेगेटिव के हिस्सों में रंग फीका और विविधताएं, हरा साँचा और झिलमिलाहट थी, जबकि 35 मिमी प्रिंट के कई हिस्सों में स्क्रेच और वर्टिकल हरी लाइने थीं। साउंड नेगेटिव पूरी तरह से खराब हो गई थी और इसका उपयोग नहीं किया जा सका। साउंड को 35 मिमी रिलीज़ प्रिंट से डिजिटलीकृत किया गया था। इस फिल्म के तत्वों की रिपेयरिंग फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन संरक्षकों द्वारा की गई थी और स्कैनिंग चेन्नई में प्रसाद लैब में की गई थी। जबकि स्कैनिंग और डिजिटल क्लीन-अप बोलोग्ना में एल'इमेजिन रिट्रोवाटा की देखरेख में प्रसाद में की गई थी। साथ ही ग्रेडिंग, साउंड रिस्टोरेशन(ध्वनि बहाली) और मास्टरिंग बोलोग्ना के लैब में की गई थी।

प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'मंथन' (1976) में दिवंगत गिरीश कर्नाड, दिवंगत प्रतिष्ठित फिल्म अभिनेत्री स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह सहित कई शानदारों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी। यह फिल्म एक असाधारण डेयरी सहकारी आंदोलन की शुरुआत का वर्णन करती है, जिसने श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीस कुरियन से प्रेरित होकर भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश में बदल दिया। ‘मंथन’ दुनिया की पहली क्राउडफंडेड फिल्म है, जो जीसीएमएमएफ के 500,000 डेयरी किसानों द्वारा निर्मित है, जिन्होंने फिल्म के निर्माण के लिए प्रत्येक ने दो रुपये का योगदान दिया है। इस फिल्म की पुनःस्थापना दुनिया की सबसे बड़ी दूध सहकारी संस्था और अमूल ब्रांड की मार्केटिंगकर्ता जीसीएमएमएफ के स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह का भी प्रतीक है। यह पुनर्स्थापित फिल्म एक जून को विश्व दूध दिवस पर पूरे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

अनिल.संजय

वार्ता

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