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एक पौधा में फलेगा 25 किलो टमाटर

एक पौधा में फलेगा 25 किलो टमाटर

नयी दिल्ली 26 फरवरी (वार्ता) जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के मद्देनजर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिक टमाटर की एक ऐसी किस्म विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी किसान प्रति पौधा 20 से 25 किलोग्राम टमाटर की पैदावार कर अपनी आय में भारी वृद्धि कर सकें । परिषद के कर्नाटक स्थित भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर) हेसरघट्टा, जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में आ रहे उतार चढाव , अधिक वर्षा और सूखे की समस्या तथा बीमारियों के बढ़ते प्रकोपों को देखते हुए टमाटर की तीन -चार उच्च उत्पादकता वाले संकर किस्मों के विकास का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है जिसे किसानों को खेती के लिए किसी भी समय जारी किया जा सकता है । संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक टी एच सिंह ने हाल में दिल्ली से गये संवाददाताओं को बताया कि तीन चार साल पहले आईआईएचआर ने प्रति पौधा 19 किलो पैदावार देने वाले टमाटर की अर्क रक्षक किस्म को खेती के लिए जारी किया था । कर्नाटक के कई प्रगतिशील किसान अपने खेतों में अर्क रक्षक से प्रति पौधा 19 किलो पैदावार ले रहे हैं जिनमें चन्द्रपा प्रमुख हैं । टमाटर की अन्य किस्मों की पैदावार प्रति एकड़ 50 टन तक ली जाती है जबकि अर्क रक्षक की पैदावार आदर्श स्थिति में 78 टन तक ली गयी है । डा सिंह ने बताया कि अर्क रक्षक मध्यम आकार का है और इसके एक फल का वजन 80 से 100 ग्राम के बीच होता है। वैज्ञानिक जिस नयी किस्म का विकास कर रहे हैं उसका वजन 120 ग्राम करने का प्रयास किया जा रहा है । इसके साथ ही ऊष्मा प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है । अभी जो टमाटर की किस्में हैं वो 30 से 35 डिग्री तापमान को सहन कर सकते हैं और अच्छी पैदावार देते हैं लेकिन नयी किस्म 40 डिग्री तापमान में भी बेहतर पैदावार देंगे । नयी किस्म को वायरस के कारण होने वाली बीमारी ‘टास्पों ’प्रतिरोधी भी बनाया जा रहा है । अरुण अर्चना जारी वार्ता

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नयी राष्ट्रीय फ़ेलोशिप शुरू करेगा आईसीएसएसआर

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04 Feb 2018 | 12:27 PM

नयी दिल्ली 04 फरवरी (वार्ता) भारतीय सामाज विज्ञान अनुसंधान परिषद (आई सी एस एस आर) के अध्यक्ष डॉ बी बी कुमार ने देश की समस्यायों को सुलझाने वाले विषयों पर मौलिक शोध कार्यों पर जोर देते हुए कहा है कि वह इस संस्थान में पहले से चली आ रही गड़बड़ियों को ठीक करने में लगे है तथा नियमों का उल्लंघन कर दी गई शोध परियोजनाओं की जांच करवा रहे हैं।बिहार के बक्सर जिले के डुमरी गाँव मे जन्में डॉ कुमार ने यूनीवार्ता को एक विशेष भेंटवार्ता में यह भी कहा कि देश में शोध एवं अनुसंधान कार्यों का भी राजनीतिकीकरण हुआ है और एक ही विषय पर बार-बार शोध से दुहराव हुआ है। इसलिए आज मौलिक शोध कार्य करने की अधिक जरूरत है।

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04 Feb 2018 | 12:00 PM

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नयी दिल्ली 30 जनवरी (वार्ता) आंशिक अथवा पूर्ण रूप से सुन पाने में असमर्थ लोगों के लिए ‘ हियरिंग एड ’ न केवल वरदान साबित हुये हैं बल्कि उन्हें हीनता के अवसाद से छुटकारा दिला रहे हैं और इनका जितना जल्द इस्तेमाल शुरू कर दिया जाये उतना ही फायदेमंद है।

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29 Jan 2018 | 5:12 PM

बीजिंग,29 जनवरी(वार्ता) बंदर का क्लाेन बनाने वाले चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका मानव क्लोन बनाने का कोई इरादा नहीं है।

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