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51 अप्रवासी बिहारी ने दिया अर्घ्य

51 अप्रवासी बिहारी ने दिया अर्घ्य

पटना, 20 नवंबर (वार्ता) लोक आस्‍था का महापर्व छठ के अवसर पर 51 अप्रवासी बिहारियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।

बिहार, झारखंड और पूर्वांचल का क्षेत्रीय चैनल बिग गंगा ने छठ के अवसर पर ‘छठ ऑनलाइन अर्घ्य’ कार्यक्रम का आयोजन किया, जहां 51 अप्रवासी बिहारियों ने डूबते हुये सूर्य को अर्घ्य दिया। इस कार्यक्रम के संयोजक और जाने-माने निर्देशक अनिल पाल अन्नू ने बताया कि लोक आस्था का महापर्व छठ बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की संस्‍कृति का एक अहम हिस्‍सा है। मान्यता है कि छठी मैया की पूजा करने से लोगों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। लोक आस्था के महापर्व छठ का महात्म्य अब केवल बिहार-उत्तर प्रदेश तक ही नहीं सीमित है, इसकी धमक सात समंदर पार तक जा पहुंची है। विदेश में भी यह पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ व्रत के जरिए प्रवासी बिहारी विदेशों में भी इसकी छाप छोड़ रहे हैं।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध एंकर-गायक और अभिनेता आलोक पांडेय और जानीमानी पार्श्वगायिका संजोली पांडेय मौजूद थी। संजोली पांडेय और आलोक पांडेय गोपाल ने कार्यक्रम को संगीतमय बना दिया। दूरदर्शन किसान चैनल पर प्रसारित फोक स्टार माटी का लाल कार्यक्रम के विजेता और महुआ चैनल पर प्रसारित सुरसंग्राम के उपविजेता आलोक पांडेय गोपाल ने बताया कि छठ बिहार का महान पर्व है और सभी बिहारी लोग इसे पूरी आस्था के साथ मनाते हैं। कोरोना को लेकर कई लोग इस बार छठ में शामिल होने के लिये बिहार में नहीं आ पाये हैं और उन्हीं लोगों के लिये बिग गंगा पर हमलोंगों ने उनकी तरफ से छठी मैय्या को अर्ध्य दिया है। बिग गंगा ने एक अच्छी पहल की है।

सोहर और कजली पर आधरित लोकगीतों के जरिये लोगों के बीच खास पहचान बना चुकी संजोली पांडेय ने बताया कि पूरे देश में छठ महापर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि वैसे प्रवासी बिहारी जो अर्ध्य देने के लिये इच्छुक थे उन्हीं लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुये बिग गंगा ने ‘छठ ऑनलाइन अर्ध्य’ का आयोजन किया, जहां 51 लोगों ने भगवान सूर्य को अर्ध्य दिया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के निर्माता राकेश तिवारी, बिग गंगा के क्रियेटिव हेड अमित श्रीवास्तव और मार्केटिंग हेड नंद जी छठी मैया के महत्व पर प्रकाश डाला। अमित श्रीवास्तव ने बताया कि हर मनोकामना को पूर्ण करने वाले इस महापर्व की ताकत ही है कि इसमें असीम आस्था रखने वाले बिहारियों को बिहार के बाहर भी ताकत मिली, सम्मान मिला। बिहार के बाहर छठ के अवसर पर बढ़ते चकाचौंध ने बिहार में भी लोक संस्कृति के इस महापर्व को भव्यता दे दी है। देश और विदेश का कोई कोना नही जहां बिहारी हो वहां छठ की छाप न हो।उन्होंने बताया कि बिग गंगा बिहार, झारखण्ड एवं उत्तर प्रदेश के सामाजिक संस्कृतिकरण की पकड़ को सालों से बनाए हुए है।

प्रेम सूरज

वार्ता

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