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देवव्रत की अध्यक्षता में प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञों की चिंतन बैठक का आयोजन

देवव्रत की अध्यक्षता में प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञों की चिंतन बैठक का आयोजन

गांधीनगर, 10 मई (वार्ता) गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर देशभर के प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञों की चिंतन बैठक-कार्यशाला का शुक्रवार को आयोजन हुआ।

सरकारी सूत्रों ने यहां बताया कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज आयोजित कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की इस बैठक में प्राकृतिक कृषि उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए सरल और सचोट पद्धति विकसित करने तथा प्राकृतिक कृषि उत्पादों के मानदंड निर्धारित करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

‌‌ हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ के प्राकृतिक कृषि फार्म में श्री देवव्रत के मार्गदर्शन में वर्षों से प्राकृतिक खेती की जा रही है। कुरुक्षेत्र में आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को योग्य बाजार मिले, उचित दाम मिले और प्राकृतिक कृषि उत्पाद खरीदने के इच्छुक ग्राहकों को भरोसेमंद उत्पाद मिलें, इस उद्देश्य से योग्य मानदंड और ठोस नीति निर्धारण हो, यह समय की मांग है। प्राकृतिक कृषि उत्पादों के प्रमाणीकरण और सर्टिफिकेशन की पद्धति सरल, सचोट और तीव्र हो, यह भी आवश्यक है।

राज्यपाल ने इस बैठक में कृषि विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संशोधन में यह सामने आया है कि हम जो गेंहू और चावल खा रहे हैं उनमें आवश्यक पोषक तत्व ही नहीं हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं के अत्यधिक उपयोग के चलते अनाज, फल और सब्जियों में धीमा जहर हमारे शरीर में प्रवेश कर रहा है। परिणामस्वरूप हम गम्भीर बीमारियों का शिकार बन रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के लिए भी रासायनिक खाद 24 प्रतिशत जिम्मेदार है। वहीं, प्राकृतिक कृषि पद्धति से जमीन की गुणवत्ता और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधरती है। सबको स्वास्थ्यप्रद अनाज मिलता है। किसान कम खर्च ज्यादा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, प्राकृतिक खेती की फसलें ज्यादा मजबूत और सक्षम होने के कारण कुदरती आपदाओं में भी किसानों को कम नुकसान उठाना पड़ता है। यह तमाम चीजें कृषि वैज्ञानिकों के संशोधन से साबित हुई हैं। परिणामत: ज्यादा से ज्यादा किसान प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। साथ ही, ज्यादा से ज्यादा लोग प्राकृतिक खेती से उत्पादित वस्तुएं खरीदने के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे में, प्राकृतिक कृषि उत्पादों के प्रमाणीकरण के लिए ठोस नीति निर्धारण करना आज आवश्यक है। इस दिशा में विचार- विमर्श करने के लिए आगे भी बैठकों का आयोजन किया जाएगा।

भारत के विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. हरिओम, हिमाचल प्रदेश के प्रो. राजेश्वर चंदेल, आंध्रप्रदेश के डॉ. डी.वी. रायडु, हरियाणा के डॉ. बलजीत सिंह सहारन, डॉ. राजिंदर चौधरी, पंजाब के उमेंद्र दत्त, गुजरात प्राकृतिक कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सीके. टिम्बडिया, गुजरात ऑगेनिक प्रोडक्ट्स सर्टिफिकेशन एजेंसी गोपका के पूर्व क्वालिटी मैनेजर रमण ओझा, इंटरनेशनल फैडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर मूवमेंट बोर्ड मेम्बर शमिका मोने, पार्टीसिपेरी गेरंटी सिस्टम ऑफ इंडिया के ऑगेनिक काउंसिल सेक्रेटरी जॉय डेनियल, तेलंगाना के रवींद्र ए., श्रीमती चंद्रकला पी., एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथॉरिटी अपेडा की जनरल मैनेजर डॉ. सास्वती बॉस, एसोसिएशन ऑफ इंडियन ऑर्गेनिक इंडस्ट्री के एक्जीक्युटिव डायरेक्टर डॉ. पीवीएसएम. गौरी, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. योगिता राणा, उप सचिव रचना कुमार तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आई.सी.ए.आर. के उच्च अधिकारियों ने इस बैठक में उपस्थित रहकर परिणामलक्ष्यी विचार-विमर्श किया।

बैठक में राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत के करकमलों से ‘नेचरल फार्मिंग एंड साइंस’ पुस्तक का विमोचन किया गया। पद्मश्री डॉ. हरिओम, डॉ. बलजीतसिंह सहारन, डॉ. विजय एवं डॉ. वेदपाल चहल लिखित हिंदी पुस्तक ‘प्राकृतिक कृषि के मूलभूत सिद्धांत’ का यह अंग्रेजी संस्करण प्राकृतिक कृषि में रूचि रखने वाले संशोधकों, वैज्ञानिकों और खेती विशेषज्ञों के लिए उपयोगी साबित होगा।

अनिल , जांगिड़

वार्ता

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