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नक्सलियों को एके-47 बेचने के मामले में एक और पुलिस हिरासत में

नक्सलियों को एके-47 बेचने के मामले में एक और पुलिस हिरासत में

जबलपुर, 06 सितंबर (वार्ता) मध्यप्रदेश की जबलपुर पुलिस ने सेन्ट्रल आर्डिनेंस फैक्टरी (सीओडी) के एक सिविल ऑफिसर को नक्सलियों और माओवादियों को एके-47 जैसे हथियारों की आपूर्ति के मामले में अपनी हिरासत में लिया है। पुलिस इस मामले में पहले ही एक सेवानिवृत्त आर्मर को गिरफ्तार कर चुकी है।

पुलिस अधीक्षक अमित सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार बिहार की मुंगेर पुलिस ने पिछले दिनों इमरान नामक व्यक्ति को एके-47 के साथ गिरफ्तार किया था। मुंगेर पुलिस से सूचना मिली थी कि इस एके-47 की आपूर्ति जबलपुर निवासी एक सेवानिवृत्त आर्मर द्वारा की गयी है। इसके बाद जबलपुर पुलिस ने मुंगेर पहुंचकर आरोपी से पूछताछ की। पूछताछ में सेवानिवृत्त आर्मर पुरुषोत्तम लाल का नाम सामने आया।

उन्होंने बताया कि रीवा की मनगवां तहसील के निवासी पुरुषोत्तम लाल को धारा 160 के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया। उससे आपत्तिजनक सामग्री मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

गोरखपुर पुलिस ने पुरुषोतम लाल के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। उसने पूछताछ के दौरान बताया कि सीओडी में सिविल ऑफिसर के पद पर पदस्थ सुरेश ठाकुर 506 आर्मी बेस बर्कशॉप में गलाने के लिए आने वाली खराब एके-47 राइफल के पार्ट निकालता था और उसे लाकर देता था। वह इन पार्ट को जोड़कर एके-47 राइफल तैयार कर पांच लाख रुपए में बिहार में बेच देता था।

पुलिस अधीक्षक अमित सिंह के अनुसार पुलिस ने सुरेश ठाकुर को अभिरक्षा में ले लिया है। उससे पूछताछ जारी है। पता लगाया जा रहा है कि आर्मी बेस वर्कशॉप से एके-47 के पार्ट निकालने में कौन उसकी मदद करता था।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी पुरुषोत्तम सौ से अधिक एके-47 राइफल बनाकर बेचना स्वीकार किया है। वह वर्ष 2008 में अायुध निर्माणी खमरिया से आर्मर के पद से सेवानिवृत्त हुआ था। सेवानिवृत्ति के बाद वह स्थानीय गोरखपुर क्षेत्र में रहने लगा था।

मुंगेर पुलिस ने आरोपी इमरान के पास से तीन एके-47, तीस मैगजीन सहित पिस्टल और अन्य हथियाारों के पार्ट बरामद किए थे। पूछताछ के दौरान इरमान ने बताया था कि वह जबलपुर निवासी सेवानिवृत्त आर्मर से एके-47 राइफल पांच लाख रुपये में खरीदता था। इन एके-47 राइफल को 15 से 20 लाख रुपये में बेच देता था।

मुंगेर पुलिस से मिली सूचना के आधार जबलपुर पुलिस सक्रिय हुई थी। जबलपुर पुलिस का एक दल इमरान से पूछताछ के लिए मुंगेर गया था। उसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ। इस समय मुंगेर पुलिस की एक टीम जबलपुर में डेरा डाले हुए है। वह जबलपुर सहित सतना, कटनी अन्य रेलवे स्टेशनों के फुटेज खंगाल रही है। अनुमति नहीं मिलने के कारण मुंगेर पुलिस पुरुषोत्तम से पूछताछ नहीं कर पाई है।

सं सुधीर

वार्ता

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