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राज्य » बिहार / झारखण्ड


स्वस्थ दिल के लिए संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम जरूरी: डॉ.मृणाल

स्वस्थ दिल के लिए संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम जरूरी: डॉ.मृणाल

दरभंगा, 16 मार्च (वार्ता) कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) के अध्यक्ष डॉ. मृणाल कांति दास ने स्वस्थ हृदय के लिए सरसों तेल को सर्वाधिक उपयुक्त खाद्य तेल बताते हुए आज कहा कि स्वस्थ दिल के लिए सिर्फ संतुलित आहार ही नहीं नियमित रुप से व्यायाम भी जरूरी है।

डॉ. दास ने यहां यूनीवार्ता से विशेष बातचीत में कहा कि देश में हृदय रोगियों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए बिहार समेत देश के चार राज्यों में हृदयाघात एवं एक्यूट कोरोनरी आर्टरी से पीड़ित लोगों का आंकड़ा संकलित करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। इस अध्ययन के बाद इन बीमारियों के उपचार के लिए समुचित दिशानिर्देश जारी किये जाएंगे।

सीएसआई अध्यक्ष ने कहा कि शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट (स्टडी) के तहत बिहार, बंगाल, उड़ीसा एवं झारखंड राज्य में गणना का कार्य शुरू किया गया है। देश में इस तरह का यह पहला अध्ययन किया जा रहा है, इसकी सफलता के बाद अन्य राज्यों में भी हृदय रोगियों की संख्या का आंकड़ा संकलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हृदय रोगियों की बढ़ती संख्या चिंताजनक है।

डॉ. दास ने कहा कि भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक संरचना भी हृदय रोग से जनित रोगों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने हृदय रोग से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए समुचित खानपान एवं रहन-सहन की सलाह देते हुए कहा कि ज्यादातर मामलों में रहन-सहन में अनुशासनहीनता की कमी के कारण हृदय रोग से संबंधित बीमारियों हो रही है।

सीएसआई अध्यक्ष ने लोगों को जंक फूड और तले हुए पदार्थों के सेवन से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि शाकाहारी भोजन का सेवन लाभदायक है। खाने में डिब्बाबंद पदार्थ और अधिक नमक युक्त पदार्थ नहीं खाना चाहिए। इसके साथ ही मांसाहारी भोजन का भी कम से कम सेवन कम करें। धूम्रपान और शराब के सेवन से भी परहेज करना चाहिए एवं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच भी कराना चाहिए।

डॉ. दास ने कहा कि शुरुआती दिनों में हृदय रोग से संबंधित जटिलताओं को किसी अन्य बीमारी से जोड़ना भ्रांति की स्थिति को पैदा करता है जिसके कारण मरीज जब तक चिकित्सक के पास पहुंचते हैं तब तक उनकी बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

जाने माने हृदय रोग चिकित्सक ने लोगों में ह्रदय रोग से बचाव के लिए जागरूकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हृदय रोग ज्यादातर मामले में अचानक उत्पन्न नहीं होते हैं। शुरुआत से ही लाइफ़स्टाइल में बदलाव, अनुशासित दिनचर्या और अनुशासित खानपान का समुचित ध्यान रखकर इससे बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए ससमय सोना और समय से जागना जरूरी है।

डॉ दास ने कहा कि अक्सर जिन्हें लोग गैस की समस्या समझते हैं वह हृदय रोग का भी लक्षण हो सकता है। कभी-कभी जबड़े में दर्द होना बाह में दर्द होना भी हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में इसकी अनदेखी नहीं करनी। चाहिए और तुरंत चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिये।



खाद्य तेल को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में डॉ.दास ने सरसों तेल को सर्वाधिक उपयुक्त बताया और कहा कि जितना हो सके कम से कम तेल के सेवन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिफाइंड तेल को लेकर भी भ्रम की स्थिति है, अन्य खाद्य तेलों की तरह इससे भी परहेज की जरूरत है।

 

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