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भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह परिषद के गठन का विधेयक लोकसभा में पारित

भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह परिषद के गठन का विधेयक लोकसभा में पारित

नयी दिल्ली 10 अगस्त (वार्ता) भारत में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय विवादों के मध्यस्थता एवं सुलह सफाई के माध्यम से समाधान को संस्थागत रूप देने के लिए लोकसभा ने आज मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) विधेयक, 2018 को पारित कर दिया। इससे देश में भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह परिषद का गठन का मार्ग प्रशस्त होगा।
लोकसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस विधेयक के पारित करने के साथ ही भारत को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय विवादों के मध्यस्थता एवं सुलह सफाई का केन्द्र बनाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है।
श्री प्रसाद ने कहा कि सरकार एक खास प्रकार से औद्योगिक एवं कारोबारी विवादों के मध्यस्थता एवं सुलह सफाई की दुनिया में सबसे ईमानदार एवं पारदर्शी व्यवस्था को संस्थागत रूप देकर मज़बूत बनाने के लिए भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह परिषद का गठन करना चाहती है। इस परिषद का अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश होंगे और उनकी अगुवाई में मध्यस्थों का पैनल काम करेगा। उन्होंने कहा कि इस समय देश भर में 36 मध्यस्थता एवं सुलह केन्द्र चल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि परिषद के कामकाज की दिशा-निर्देशिका एवं नियमावली बनायी जाएगी तथा मध्यस्थों के प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनसामान्य के साथ-साथ सांसदों, सरकार में वित्त सचिव, बैंकों के अध्यक्ष आदि के पदों पर रह चुके लोग भी बेहतर मध्यस्थ हो सकते हैं। उन्हें भी इसके लिए अवसर मिल सकेगा।
श्री प्रसाद ने कहा कि परिषद में नियमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। मध्यस्थता की पुख्ता प्रणाली होगी। भारत में बहुत अच्छे न्यायाधीश और वकील हैं जिनमें विवादों के समाधान निकालने की विलक्षण क्षमताएं हैं। देश में ऐसे मध्यस्थों का एक बड़ा वर्ग तैयार हो रहा है। उन्हाेंने कहा कि भारत को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय विवाद निस्तारण केन्द्र बनाने की दिशा में एक बड़ी छलाँग लगायी गयी है।
इसके बाद सदन ने विधयेक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले चर्चा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मोहम्मद सलीम, भारतीय जनता पार्टी के गोपाल शेट्टी, कांग्रेस की सुष्मिता देव ने भी भाग लिया। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया लेकिन उसे अधिक विचार-विमर्श के लिए स्थायी समिति के पास भेजने की बात कही थी।
सचिन अजीत
वार्ता

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