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भाजपा एनआरसी को विफल करना चाहती है: गोगोई

भाजपा एनआरसी को विफल करना चाहती है: गोगोई

गुवाहाटी 01 सितंबर (वार्ता) असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) अद्यतन एवं अंतिम सूची प्रकाशित होने के एक दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी इस मसले को विफल करना चाहती है, ताकि विदेशी मूल के मुद्दे को जिंदा रखकर उसका राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

श्री गोगोई ने कहा, “राज्य सरकार एनआरसी को विफल करना चाहती है। भाजपा आंतरिक रूप से एनआरसी को विफल करना चाहती है, ताकि विदेशी मूल के मुद्दे को जिंदा रखा जा सके।”

राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे श्री गोगोई ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा और विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत साइकिया के साथ आज यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी में नहीं शामिल है, उनके पास इस सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए विदेशी न्यायाधिरण में अपील करने का क्या प्रावधान है। उन्होंने कहा, “भाजपा नीत राज्य सरकार बार-बार कह रही है कि जिन लोगों का नाम एनआरसी सूची में नहीं है, वे विदेशी नहीं हैं। यदि वे लोग विदेश नहीं है, तो उन्हें विदेशी न्यायाधिकरम में क्यों अपील करनी चाहिए?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की चुप्पी पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, “भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास एनआरसी को खारिज कर चुके हैं, राज्य के मंत्री हिमंता विश्व शर्मा इसकी पुनर्सत्यापन की मांग कर चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अभी तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि वह एनआरसी की अंतिम सूची को स्वीकार कर रहे हैं या अस्वीकार कर रहे हैं।”



उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्य में विदेशी नागरिकों के खिलाफ अभियान चलाने वाले प्रफुल्ल कुमार महंत पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, “श्री महंत ने कहा था कि राज्य में 40 से 50 लाख अवैध विदेशी है और अब वह कह रहे हैं कि वह एनआरसी की अंतिम सूची से संतुष्ट हैं।

उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोरा ने कहा कि जिन लोगों का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में नहीं है, उन्हें इसके लिए कारण बताना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि असम में एनआरसी की अंतिम एवं अद्यतन सूची शनिवार को प्रकाशित हुई थी, जिसमें 3.11 करोड़ लोगों के नाम है, जबकि 19 लाख लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं है।

संतोष जितेन्द्र

वार्ता

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