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लॉकडाउन में भूले बिसरे गीतकारों के इतिहास पर किताब

लॉकडाउन में  भूले बिसरे गीतकारों के इतिहास पर किताब

नयी दिल्ली 27 सितंबर (वार्ता ) क्या आपको मालूम है कि देश में 1933 में ही एक ऐसी सवाक हिंदी फ़िल्म "कर्मा " बनी जिसमे एक गाना अँग्रेजी में भी था। इस फ़िल्म के निर्माता हिमांशु राय थे और उसकी नायिका उनकी पत्नी देविका रानी थी जिन्होंने एक गाना अपनी आवाज में गया था।

फिल्मों में पार्श्व गायन की शुरुआत 1935 में बनी फिल्म "धूप छांव "से हुई थी और इसके गीतकार पंडित सुदर्शन थे।

इस फिल्म का संगीत उस जमाने के दो प्रसिद्ध संगीतकारों राय चन्द्र बोराल और पंकज मलिक ने दिया था।

हिंदी फिल्मों के पहले स्वतंत्र गीतकार दीनानाथ मधोक ही थे जबकि अन्य चर्चित गीतकारों में सर्व श्री सम्पत लाल श्रीवास्तव उर्फ अनुज ,प्यारे संतोषी लाल ,रमेश गुप्ता पंडित इंद्र सरस्वती कुमार" दीपक ", मुंशी अब्बास अली, आरजू लखनवी, तनवीर नकवी ,पंडित मधुर गजानन जागीदार जैसे अनेक लोग थे जिन्हें लोग आज जानते तक नहीं या उनके नाम भूल चुके।

गीतकार प्रदीप ने भी फिल्मों में गाने गाये थे। मुंशी प्रेमचंद ने शेरदिल औरत और नौजवान फ़िल्म के लिए भी संवाद लिखे थे। नौजवान पहली फ़िल्म थी, जिसमें कोई गाना नही था।

हिंदी सिनेमा के आरंभिक दौर में तुलसीदास कबीर दास, सूरदास, मीरा और रैदास के पदों को गीत के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

महाकवि जयशंकर प्रसाद और सुमित्रनन्द पंत के गीतों का भी इस्तेमाल फिल्मों में हुआ था और प्रख्यात लेखक अमृतलाल नागर ने भी फिल्मों के लिए गीत लिखे थे।

यह दुर्लभ जानकारी सूचना प्रसारण मंत्रलाय के प्रकाशन विभाग द्वारा लॉक डाउन में प्रकाशित पुस्तक" सात सुरों का मेला" में दी गई है। फ़िल्म पत्रकार राजीव श्रीवास्तव द्वारा लिखित इस पुस्तक के लिए मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी ने "सात सुरों का मेला " नाम से एक गीत भी लिखा था जिसे किताब में शामिल किया गया है।

श्री श्रीवास्तव ने अपनी फिल्मी पत्रकारिता के दौरान सदाबहार अभिनेता देवानंद से लेकर स्वर कोकिला लता मंगेशकर, आशा भोंसले ,मन्ना डे , नौशाद, अमिताभ बच्चन, यश चोपड़ा, मजरूह सुल्तानपुरी और अमीन सयानी जैसे लोगों से मिलकर फिल्मी गीतों के बारे में कई दुर्लभ जानकारियां एकत्र की है और उसके आधार पर उन्होंने यह किताब लिखी है। उन्होंने किताब की भूमिका में इसका जिक्र भी किया है।

अरविंद, यामिनी

जारी वार्ता

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