Wednesday, Jun 26 2019 | Time 01:08 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • यमन में सेना से संघर्ष में छह हाउती लड़ाके ढ़ेर
लोकरुचि


घाडियालो के बच्चो से चंबल गुलजार

घाडियालो के बच्चो से चंबल गुलजार

इटावा, 08 जून (वार्ता) चिलचिलाती गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के इटावा में चंबल नदी इन दिनो हजारों की तादाद में जन्में घडियालों के बच्चों से गुलजार हो गयी है ।

प्रजनन के बाद जन्में घडियालों के बच्चों से वन्य जीव प्रेमिंयो में खुशी दौड़ गयी है। लगभग 2100 वर्ग मीटर में फैले नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी में वर्ष 1989 से घड़ियालों को संरक्षण देना शुरू हुआ था।

चंबल सेंचुरी के जिला वनाधिकारी (डीएफओ) आंनद कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि जितनी तादादण्त मे घडियाल के बच्चे चंबल मे नजर आ रहे उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि यह दुर्लभ प्रजाति के जलचर के लिये शुभ संकेत है।

उन्होंने बताया कि इटावा रेंज के खेड़ा अजब सिंह और कसऊआ गांव में 34 घोसलों में से 14 की हैचिंग हो चुकी है । यहां पर लगभग 300 नन्हें घड़ियाल जन्म ले चुके हैं। पिनाहट रेंज के रेहा घाट पर 300 नन्हें घड़ियालों ने जन्म लिया है। विप्रावली में लगभग 200 घड़ियाल अंडों से निकल चुके हैं। इधर पिनाहट में दो दर्जन घड़ियाल हैचिंग कर चुके हैं। चंबल की रेतिया में 500 नन्हें घड़ियाल अटखेलियां करते नजर आ रहे हैं । ऐसे ही बाह के कैंजरा, हरलालपुरा और नंदगंवा में भी लगभग दो दर्जन घड़ियालों की हैचिंग अगले एक-दो दिन में होने की संभावना है। ऐसे में जल्द ही चंबल नदी के किनारे घड़ियालों की नयी फौज अटखेलियां करती दिख सकती है ।

राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी के अफसरो की माने तीन राज्यो मे पसरी चंबल नदी मे एक अनुमान के मुताबिक 5000 के आसपास घडियाल के छोटे छोटे बच्चे पानी मे तैरते हुए दिखलाई दे रहे है । उत्तर प्रदेश मध्यप्रदेश और राजस्थान मे प्रवाहित चंबल नदी मे दुर्लभ प्रजाति के घडियालो को संरक्षण के मददेनजर चंबल नदी को संरक्षित कर रखा गया है। कसाऔ मे चंबल नदी के किनारे एक ऐसा मनोरम दश्य देखने को मिला हुआ है जहॉ पर एक विशालकाय घाडियाल अपनी पीठ पर सैकडो की तादात मे अपने मासूम बच्चो को बैठाये हुए है । उसे देखने के बाद इंसानी बच्चो के दुलार की याद आ जाती है । यह एक ऐसा घडियाल है जो बडे आराम से अपनी पीठ पर बच्चो को बैठाये रहता है जब कोई हरकत उसको सुनाई देती है तो वह अपने बच्चो को पीठ से उतारता है अन्यथा सभी बच्चे उसकी पीठ पर बैठ कर ही आंनद लेते रहते है । सुबह शाम यह दृश्य गांव वालो के लिए बडे ही आंनद का विषय इस समय बना हुआ है ।

चंबल मे साल 2007 से फरवरी 2008 तक जिस तेजी के साथ किसी अनजान बीमारी के कारण एक के बाद एक करके करीब सवा अधिक तादात में घडियालों की मौत हुई थी उसने समूचे विश्व समुदाय को चिंतित कर दिया था । ऐसा प्रतीत होने लगा था कि कहीं इस प्रजाति के घडियाल किसी किताब का हिस्सा न बनकर रह जाएं ।

घडियालों के बचाव के लिए तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं आगे आई और फ्रांस, अमेरिका सहित तमाम देशों के वन्य जीव विशेषज्ञों ने घडियालों की मौत की वजह तलाशने के लिए तमाम शोध कर डाले। घडियालों की हैरतअंगेज तरीके से हुई मौतों में जहां वैज्ञानिकों के एक समुदाय ने इसे लीवर क्लोसिस बीमारी को एक वजह माना तो वहीं दूसरी ओर अन्य वैज्ञानिकों के समूह ने चंबल के पानी में प्रदूषण की वजह से घडियालों की मौत को कारण माना । वहीं दबी जुबां से घडियालों की मौत के लिए अवैध शिकार एवं घडियालों की भूख को भी जिम्मेदार माना गया।

पर्यावरणीय संस्था सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के सचिव एवं वन्य जीव विशेषज्ञ संजीव चौहान बताते हैं कि पंद्रह जून तक घडियालों के प्रजनन का समय होता है जो मानसून आने से आठ-दस दिन पूर्व तक रहता है। घडियालों के प्रजनन का यह दौर ही घडियालों के बच्चों के लिए काल के रुप में होता है क्योंकि बरसात में चंबल नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप घडियालों के बच्चे नदी के वेग में बहकर मर जाते हैं। वे कहते हैं कि महज दस फीसदी ही बच्चे बच पाते हैं जबकि 90 फीसदी बच्चों की पानी में बह जाने से मौत हो जाती है।

दुनियाभर में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे घड़ियालों का चंबल नदी में संरक्षण हो रहा है। पहले घड़ियालों के अंडों को हैचिंग के लिए कुकरैल प्रजनन केंद्र लखनऊ ले जाना पड़ता था । अब 10 साल से चंबल नदी में प्राकृतिक (अंडे सेने की प्रक्रिया) हैचिंग हो रही है। 65 से 70 दिन का हैचिंग का समय शुरू होने पर वन विभाग ने घोसलों पर लगी जाली हटा दी है । बता दें कि नेस्टिंग के टाइम पर वन विभाग ने जीपीएस से लोकेशन ट्रेस कर जाली लगाई थी ताकि वन्यजीव इनके अंडों को नष्ट न कर सकें ।

सं प्रदीप

वार्ता

More News
बदहाली का दंश झेलने का मजबूर पतंजलि की जन्मस्थली

बदहाली का दंश झेलने का मजबूर पतंजलि की जन्मस्थली

19 Jun 2019 | 2:02 PM

गोण्डा 19 जून (वार्ता) समूची दुनिया 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की तैयारी में जुटी हैं वहीं योग के जनक माने जाने वाले महायोगी महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली आज भी बदहाली का दंश झेलने को मजबूर है

see more..
मां यशोदा के हाथों बादाम का हलवा खाकर कान्हा हुये स्वस्थ

मां यशोदा के हाथों बादाम का हलवा खाकर कान्हा हुये स्वस्थ

18 Jun 2019 | 12:49 PM

मथुरा, 18 जून (वार्ता) हर पल भक्तिरस में सराबोर रहने वाली कान्हा नगरी के वृन्दावन स्थित प्राचीन राधारमण मंदिर में चल रहे निकुंज उत्सव में जलयात्रा के दौरान शीतल जल से अधिक स्नान करने से राधारमण लाल ज्वर से पीड़ित हो गए।

see more..
राधारमण मंदिर में श्रद्धा, भक्ति एवं संगीत की त्रिवेणी

राधारमण मंदिर में श्रद्धा, भक्ति एवं संगीत की त्रिवेणी

16 Jun 2019 | 4:37 PM

मथुरा, 16 जून (वार्ता) वृन्दावन के सप्त देवालयों में मशहूर प्राचीन राधारमण मंदिर में दिव्य ग्रीष्मकालीन निकुंज सेवा में श्रद्धा, भक्ति एवं संगीत की त्रिवेणी बह रही है।

see more..
असीम संभावानाओं वाला पचनद स्थल उपेक्षा का है शिकार

असीम संभावानाओं वाला पचनद स्थल उपेक्षा का है शिकार

15 Jun 2019 | 11:38 PM

जालौन 15 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश की सूखाग्रस्त बुंदेलखंड की धरती पर जालौन जिला मुख्यालय से महज 55 किलोमीटर की दूरी पर हरे भरे जंगलों और ग्रामीण अंचल के बीच एक ऐसा मनोहारी दर्शनीय स्थल मौजूद है जो एकबार बुंदेलखंड में होने का एहसास ही भुला देता है और वह स्थान है पांच नदियों के संगम से बना “ पचनद स्थल ” ।

see more..
निखिल संग परिणय सूत्र में बंधने जा रही नुसरत

निखिल संग परिणय सूत्र में बंधने जा रही नुसरत

14 Jun 2019 | 6:37 PM

कोलकाता 14 जून (वार्ता ) तृणमूल कांग्रेस सांसद एवं लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां शीघ्र ही बिजनेसमैन निखिल जैन के साथ परिणयसूत्र में आबद्ध होने जा रही हैं।

see more..
image