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चंबल में बंदूक के बाद ‘सुरा’ को तिलांजलि देने का गुर्जरों ने दिया संदेश

चंबल में  बंदूक  के बाद ‘सुरा’ को तिलांजलि देने का गुर्जरों ने दिया संदेश

इटावा, 19 जुलाई (वार्ता) करीब डेढ दशक पहले तक डाकुओं की शरणस्थली के तौर पर कुख्यात रही चंबल घाटी में गुर्जर समुदाय से जुडे डाकुओं ने बंदूक तो पहले ही छोड दी थी और परिवार की भलाई के लिए उन्होने अब शराब को भी तिलांजलि दे प्रगतिशील जीवन की शुरूआत की है ।

गुर्जर विकास परिषद के उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह गुर्जर बाबा बताते है कि राजस्थान धौलपुर के मौरौली गांव निवासी संत शिरोमणि 1008 श्रीहरिगिरि महाराज के उपदेश से समाज के लोगो ने खुद को शराब से दूर रखने की शपथ ली है । संत के समक्ष ली गई शपथ का व्यापक असर होता दिखाई दे रहा है। मध्यप्रदेश के भिंड,मुरैना और ग्वालियर जिलो में संत की शपथ को आत्मसात करना लोगो ने शुरू कर दिया है।

उन्होने बताया कि इलाके में गुर्जर जाति के 42 प्रभावी गांव है। सभी जगह संत की शपथ पर काम करने के लिए समाज के सैकडो की तादाद मे युवा सक्रिय बने हुए है। डेढ दशक पहले जब डाकुओ की फौज सक्रिय हुआ करती थी तब समाज के लोगो के सामने खासी मुश्किल हुआ करती थी। हर आदमी को पुलिस डाकू समझ कर काम करती थी जिससे समाज के लोगो के सामने परेशानी ही परेशानी हुआ करती थी लेकिन आज कोई संकट नही है। चकरनगर समेत जिले के 22 गांव के गुर्जर समाज के लोगों ने न सिर्फ शराब को तौबा कह दी बल्कि बारात में बैंड और आतिशबाजी पर भी पूरी तरह रोक लगा दी।

इस वर्ग के इस निर्णय की चंबल इलाके मे जमकर प्रंशसा की जा रही है क्योंकि गुर्जर समाज के डाकुओ के आंतक के राज में समाज के हर व्यक्ति को शक की नजर से ना केवल देखा जाता रहा है बल्कि उसकी भूमिका भी डाकू जैसी ही मानी जाती रही है।

एक समय चंबल घाटी मे कुख्यात डकैत निर्भय गुर्जर, रज्जन गुर्जर, रामवीर गुर्जर,अरविंद गुर्जर,सलीम गुर्जर और जगन गूर्जर जैसे डकैतों का खासा आंतक रहा है। इन डाकुओ के आंतक ने पूरी की पूरी गुर्जर जाति पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। इन दस्युओं की वजह से यहां रहने वाला पूरा गुर्जर समुदाय भी हमेशा शक के घेरे में रहता था।

दस्युओं के खौफ में इस समाज के लोग शराब व अन्य बुराइयों में डूबे हुए थे। हालांकि समय बदला और चंबल के बीहड़ से डकैतों का राज खत्म हुआ। इससे न केवल गुर्जर समुदाय ने खुलकर सांस ली बल्कि शराब से तौबा व तमाम कुप्रथाओं से भी किनारा करने का एलान कर दिया ।

चंबल में प्रतिर्स्पधा के चलते साल 2004 में गूर्जर डाकुओ में आपस में गैंगवार के चलते अरविंद रामवीर गूर्जर को मौत के घाट उतारने के लिए जहॉ निर्भय ने 20 लाख का इनाम घोषित किया था वही अरविंद और रामवीर ने निर्भय पर 40 लाख का इनाम घोषित किया लेकिन कोई किसी को ठिकाने नही लगा सका।

गुर्जर समाज के लोगों ने पूर्ण रूप से शराब बंद कर दी है। यही नहीं शादी में दहेज, चढ़ावा और तेरहवीं भी सीमित दायरे में कर दी है। इसके अलावा शराब पीने वाले पर जुर्माना और पकड़ाने वाले को इनाम का भी नियम बनाया गया है । गुर्जर समाज के उक्त संदेश ने समाज को एक नई दिशा दी है। गुर्जर समाज के अहम लोगो ने एक शर्त भी रखी गई है कि यदि गांवों में कोई भी गुर्जर समाज का व्यक्ति शराब पीए हुए पकड़ा जाता है तो उसे 11 हजार रुपये का जुर्माना कमेटी को देना होगा ।

शराब पीने वाले की सूचना देने वाले युवक को भी एक हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा वहीं सिर्फ तीन बार ही जुर्माना स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा फिर समाज का कोई भी व्यक्ति न उसके घर पर अपनी बेटी की शादी करेगा और न ही उसकी बेटी को अपनी बहू बनाएगा। इस अनूठी पहल को सफल बनाने के लिए कमेटी बनाई गई है, जिसके सदस्य गांव गांव जाकर संदेश दे रहे हैं। सिर्फ शराब को तौबा कहने के साथ साथ बारात में बैंड और आतिशबाजी पर भी पूरी तरह रोक लगा दी।

गुर्जर समुदाय के बदले हुए मिजाज पर इटावा के एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी कहते है कि अगर कोई समाज पुरानी कुरातियों को खत्म करने के लिए कोई नया परिवर्तन कर रहा है तो फिर इससे बेहतर और क्या बात हो सकती है। समाज के सभी लोग बधाई के पात्र है क्योंकि डाकुओ की छाप से कई परिवार का जीवन कभी बरामद हुआ रहा ।

इटावा के कर्मक्षेत्र पोस्ट ग्रेजुएट पीजी कालेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ0 शैलेंद्र शर्मा कहते है कि कोई भी व्यक्ति या समुदाय अपने उपर लगे हुए आक्षेपो को हटाने के लिए समाजिक कुरीतियो को दूर करने के लिए होने वाले जन आंदोलनो मे भाग लेता रहता है और यह इतिहास में भी होता रहा है वह चाहे डकैत बाल्मीक की बात हो या फिर अगुंलीमाल जैसे लोगो की। इन लोगो ने भी अपने उपर लगे आपेक्षों को हटाने के लिए जनआंदोलन मे भाग लिया था ।

वार्ता

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