Saturday, Apr 21 2018 | Time 11:34 Hrs(IST)
image
image image
BREAKING NEWS:
  • रवि थापर बने निकारागुआ के नये राजदूत
  • लेह, मुगल रोड फिर से बंद, कश्मीर राजमार्ग वाहनों के लिए शुरू
  • कश्मीर में रेल सेवा फिर से बहाल
  • उ कोरिया ने की मिसाइल, परमाणु परीक्षण नहीं करने की घोषणा
  • यूरोपीय संघ को अमेरिकी टैरिफ से ‘पूर्ण’ छूट की आवश्यकता: मेयर
  • तीन देशों की सफल यात्रा के बाद स्वदेश पहुंचे मोदी
  • आईपीएल में सट्टा लगाने वाले तीन सटोरिये गौतमबुद्धनगर से गिरफ्तार
  • आज का इतिहास (प्रकाशनार्थ 22 अप्रैल)
  • इंडियाना में अप्रैल ‘सिख विरासत माह’ घोषित
  • उ कोरिया अब नहीं करेगा परमाणु परीक्षण
  • हवाई हमले में 20 लोगों की मौत
  • केजरीवाल ने की मालिवाल से हड़ताल समाप्त करने की अपील
  • चांसलर मर्केल के साथ अद्‌भुत रही बैठक: मोदी
  • मोदी और मर्केल ने द्विपक्षीय संबंध बढ़ाने पर दिया जोर
लोकरुचि Share

मलूक दास के दोहे मानवीय मूल्यों के लिये आज भी प्रासंगिक

मलूक दास के दोहे मानवीय मूल्यों के लिये आज भी प्रासंगिक

कौशाम्बी 13 अप्रैल (वार्ता) मध्य युगीन हिन्दी साहित्य में सन्त परम्परा की अन्तिम कड़ी के रूप में प्रसिद्ध सन्त शिरोमणि मलूक दास के दोहे मानवीय मूल्यों को स्थापित करने तथा सामाजिक सरसता को बनाये रखने में आज भी बहुत प्रासंगिक है। सन्त मलूक दास का जन्म पुरातन में वत्स देश की राजधानी रही वर्तमान कौशाम्बी जिले के ऐतिहासिक स्थान ‘कड़ा’ में सम्वत् 1631 में वैशाख बदी पंचमी को हुआ था। 108 वर्ष का लम्बा जीवन जीकर इस सन्त ने वैशाख बदी चतुर्दशी सम्वत् 1739 को इस संसार से महा प्रयाण किया। भक्ति भावना से अभिभूत अपनी जिन अभिभूतियों को इस सन्त ने पदनात्मक रूप मे गाया। वे दाेहे इतने लोकप्रिय साबित हुए कि दूर दूर तक कुछ भी न जानने वाले किसान मजदूरों से भी उन्हे आज भी सुना जाता है। अजगर करे न चाकरी पंछी करै न काम। दास मलूका कह गए सब का दाता राम।। मलूकदास का यह दोहा सम्पूर्ण विश्व मे अपनी सारगर्भिता को लेकर साहित्यकारों के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है। उपरोक्त दोहे को लेकर लोग इस संत को न केवल याद करते हैं, बल्कि उनकी स्मृति को अपने जेहन मे सहेज कर रखे हुए हैं। सं नरेन्द्र राज जारी वार्ता

More News
सीमा की रक्षा के साथ साथ लोगों को स्वावलंबन के गुर भी सिखा रहा है एसएसबी

सीमा की रक्षा के साथ साथ लोगों को स्वावलंबन के गुर भी सिखा रहा है एसएसबी

19 Apr 2018 | 2:29 PM

गोण्डा ,19 अप्रैल (वार्ता ) नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश में देवी पाटन मंडल के तीन जिलों बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले थारू जनजाति समेत सभी वर्गों के गरीब परिवारों के लिये वरदान साबित हो रही है।

 Sharesee more..
पन्ना में बाघ पुनस्र्थापना की वर्षगांठ कल

पन्ना में बाघ पुनस्र्थापना की वर्षगांठ कल

15 Apr 2018 | 8:11 PM

पन्ना, 15 अप्रैल (वार्ता) मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व की बाघ पुनरुर्थापना योजना की 8वीं वर्षगांठ यहां मड़ला स्थित कर्णावती प्रकृति व्याख्या केन्द्र में कल मनाया जायेगा

 Sharesee more..
‘चिप्स’ की खातिर बलि चढ़ रहे कछुए

‘चिप्स’ की खातिर बलि चढ़ रहे कछुए

10 Apr 2018 | 3:21 PM

इटावा , 10 अप्रैल (वार्ता) चंबल की सुरम्य वादियों के बीच कलकल बहती चंबल नदी में विचरते विशेष प्रजाति के कछुये ‘चिप्स’ की खातिर शिकारियों की निगाह में चढे हुये हैं।

 Sharesee more..
image