Monday, Dec 9 2019 | Time 04:49 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • फिनलैंड में सन्ना बनी सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री निर्वाचित होने वाली महिला
  • महाभियोग लेख इस सप्ताह पेश किया जा सकता है: जेरी
  • कोस्टा रिका में मध्य स्तर के भूकंप के झटके
  • ईरान में सीमा रक्षकों ने 500 किलोग्राम अफीम जब्त किया
  • नेतन्याहू ने गाजा पट्टी में संभावित सैन्य अभियान की तैयारी का दिया आदेश
  • उत्तर कोरिया को परमाणु निरस्त्रीकरण के समझौत पर अमल करना चाहिए:ट्रम्प
राज्य » बिहार / झारखण्ड


देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया है देव के सूर्यमंदिर का निर्माण

देवशिल्पी विश्वकर्मा ने किया है देव के सूर्यमंदिर का निर्माण

औरंगाबाद 01 नवंबर (वार्ता) बिहार के औरंगाबाद जिले में देव स्थित ऐतिहासिक त्रेतायुगीन पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर अपनी कलात्मक भव्यता के लिए सर्वविदित और प्रख्यात होने के साथ ही सदियों से देश-विदेश के पर्यटकों, श्रद्धालुओं और छठव्रतियों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मंदिर की अभूतपूर्व स्थापत्य कला, शिल्प, कलात्मक भव्यता और धार्मिक महत्ता के कारण ही जनमानस में यह किंवदंति प्रसिद्ध है कि इसका निर्माण देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं अपने हाथों से किया है। देव स्थित भगवान भास्कर का विशाल मंदिर अपने अप्रतिम सौंदर्य और शिल्प के कारण सदियों से श्रद्धालुओं, वैज्ञानिकों, मूर्तिचोरों, तस्करों एवं आमजनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। काले और भूरे पत्थरों की अति सुंदर कृति जिस तरह ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर का शिल्प है, ठीक उसी से मिलता-जुलता शिल्प देव के प्राचीन सूर्य मंदिर का भी है।

मंदिर के निर्माणकाल के संबंध में उसके बाहर ब्राह्मी लिपि में लिखित और संस्कृत में अनुवादित एक श्लोक उत्कीर्ण है, जिसके अनुसार 12 लाख 16 हजार वर्ष त्रेता युग के बीत जाने के बाद इलापुत्र पुरूर्वा ऐल ने देव सूर्य मंदिर का निर्माण आरंभ करवाया। शिलालेख से पता चलता है कि वर्ष 2018 तक इस पौराणिक मंदिर के निर्माण काल के एक लाख पचास हजार अठारह वर्ष पूरे हो गये हैं।

देव मंदिर में सात रथों से सूर्य की उत्कीर्ण प्रस्तर मूर्तियां अपने तीनों रूपों- उदयाचल-प्रात: सूर्य, मध्याचल- मध्य सूर्य और अस्ताचल -अस्त सूर्य के रूप में विद्यमान है। पूरे देश में देव का मंदिर ही एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर है, जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है। करीब एक सौ फुट ऊंचा यह सूर्य मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। बिना सीमेंट अथवा चूना-गारा का प्रयोग किये आयताकार, वर्गाकार, अर्द्धवृत्ताकार, गोलाकार, त्रिभुजाकार आदि कई रूपों और आकारों में काटे गये पत्थरों को जोड़कर बनाया गया यह मंदिर अत्यंत आकर्षक एवं विस्मयकारी है।

जनश्रुतियों के आधार पर इस मंदिर के निर्माण के संबंध में कई किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं, जिससे मंदिर के अति प्राचीन होने का स्पष्ट पता तो चलता है लेकिन इसके निर्माण के संबंध में अभी भी भ्रामक स्थिति बनी हुई है। निर्माण के मुद्दे को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्व विशेषज्ञों के बीच चली बहस से भी इस संबंध में ठोस परिणाम प्राप्त नहीं हो सके हैं।

प्रेम सूरज

जारी वार्ता

More News
जनता को पांच साल तक बेवकूफ बनाती रही रघुवर सरकार : हेमंत

जनता को पांच साल तक बेवकूफ बनाती रही रघुवर सरकार : हेमंत

08 Dec 2019 | 8:01 PM

गिरिडीह 08 दिसंबर (वार्ता) झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की रघुवर दास सरकार पर आम लोगों की गाढ़ी कमाई को खुद के चुनाव प्रचार पर खर्च करने का आरोप लगाते हुए आज कहा कि यह सरकार जनता को पांच साल तक केवल बेवकूफ बनाती रही है।

see more..
भाजपा पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले दे 70 साल का हिसाब : स्मृति

भाजपा पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले दे 70 साल का हिसाब : स्मृति

08 Dec 2019 | 8:01 PM

गिरिडीह 08 दिसंबर (वार्ता) केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता स्मृति इरानी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आज कहा कि केंद्र और झारखंड की भाजपा सरकार पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को पहले 70 सालों का हिसाब देना चाहिए।

see more..
वोट बैंक के चलते शरणार्थी और घुसपैठियों में फर्क नहीं करती कांग्रेस : सुशील

वोट बैंक के चलते शरणार्थी और घुसपैठियों में फर्क नहीं करती कांग्रेस : सुशील

08 Dec 2019 | 8:01 PM

पटना 08 दिसंबर (वार्ता) बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कांग्रेस के नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध पर पलटवार करते हुए आज कहा कि वह केवल वोट बैंक के कारण देश में शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच फर्क नहीं करती है।

see more..
image