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हिंदी को सरल, सुलभ और रूचिकर बनाने पर हुआ विमर्श

हिंदी को सरल, सुलभ और रूचिकर बनाने पर हुआ विमर्श

गोस्वामी तुलसीदास नगर (मॉरिशस) 19 अगस्त (वार्ता) मॉरिशस में चल रहे 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में आज हिंदी भाषा को सरल, सुलभ और रूचिकर बनाकर उसका प्रचार-प्रसार करने को लेकर गहन विमर्श हुआ।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार, अपर सचिव (प्रशासन) एवं समन्वयक संजय कुमार वर्मा, संयुक्त सचिव संजय पांडा और भारतीय उच्चायुक्त अभय ठाकुर ने तीन दिवसीय विश्व हिंदी सम्मेलन के दूसरे दिन के सत्र के समापन के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अब तक के सत्रों में भाषा और संस्कृ़ति को जोड़ने वाले सभी प्रासंगिक विषयों पर विमर्श हुआ। इस दौरान हिंदी में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर गहन विमर्श हुआ। विमर्श के दौरान विचार आया कि क्या हिंदी का सॉफ्टवेयर विकसित किया जाये, जो महंगी न हो और आसानी से सबके लिए सुलभ हो। इसके साथ ही सॉफ्टवेयर की हिंदी भाषा क्लिष्ठ न होकर रूचिकर और आसान हो।

श्री वर्मा ने कहा कि हिंदी शिक्षण के जरिये भारत की संस्कृति का विदेशों में प्रचार हो सकता है। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान यह विचार रखे गये कि क्या हिंदी केवल देवनागरी लिपि में ही पढ़ी और पढ़ाई जा सकती है। क्या विदेशों की लिपि के माध्यम से हिंदी भाषा का पठन-पाठन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस दौरान यह विचार भी आया कि भारतीय संस्कृति के मूल आदर्श ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के आधार पर क्या हिंदी का प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता है। वहीं, हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए फिल्मों को बेहतर साधन सवीकार किया गया।

सम्मेलन में कुल 1952 पंजीकृत प्रतिभागी शामिल हुये जबकि 1425 वैसे प्रतिभागी भी शरीक हुये जो खुद के खर्च पर यहां आये हैं। यह संख्या हिंदी भाषा और उसके विकास के लिए लोगों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत से 856 पंजीकृत एवं 528 आम प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में 12 देशों के 41 डेलिगेट्स भी शरीक हुये।

शिवा. उपाध्याय

वार्ता

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