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कुम्भ के दौरान श्रद्धालुओं को मिलेगा अविरल और निर्मल जल

कुम्भ के दौरान श्रद्धालुओं को मिलेगा अविरल और निर्मल जल

प्रयागराज,10 जनवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ मेले में श्रद्धालुओं को आस्था की डुबकी लगाने के लिए अविलरता और निर्मल गंगा जल मिलेगा।

श्री योगी ने गुरूवार को यहां कई कार्यक्रमों में शिरकत करने आये थे। इस दौरान उन्होंने मीडि़या सेन्टर में संवाददाताओं से कहा कि विश्व के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा में स्नान करने के लिए अविरल और निर्मल जल मिलेगा। साधु-महात्मा और श्रद्धालुओं को गंगा स्नान के लिए प्रर्याप्त जल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार “नमामि गंगे परियोजना” के माध्यम से गंगा और उसकी सहायक नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए 26 हजार करोड़ रूपये से अधिक स्वीकृत किए हैं। इसकी शुरूआत प्रयागराज से हुई है और आगे भी बरकरार रहेगी।

कुम्भ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सभी का सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान देश विदेश से करोड़ो श्रद्धालु गंगा में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। उनकी आस्था किसी प्रकार आहत न/न हो इसके लिए स्नान पर्व से लेकर चार मार्च तक लगातार गंगा में पानी का क्रम बना रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने कुम्भ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। इसके साथ ही 15 दिसम्बर को श्री मोदी की प्रेरणा से 71 देशों के राजदूतो प्रयागराज की धरती पर पधार कर कुम्भ को वैश्विक मान्यता दी है। अपने-अपने देशों के ध्वज पताका को कुम्भ क्षेत्र में स्थापित करके इस पूरे आयोजन को वैश्विक मान्यता देने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुम्भ की दृष्टि से देश और दुनिया के अन्दर एक नया संदेश दे सके ‘ एक स्वच्छ कुम्भ- एक सुरक्षित कुम्भ जिसकी सही थीम हो जो हम एक ‘भव्य और दिव्य’ कुम्भ की ओर लेकर चलता है। प्रयागराज में गंगा, यमुना ओर अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी में कुम्भ के दौरान दुनिया से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। उस आस्था का सम्मान हो सके यह एक प्रयास किया गया है।

प्रयागराज में यहां कीप्राचीन परंपरा आस्था को “ पेंट माई सिटी” के माध्यम से लगभग 15 लाख वर्ग फीट क्षेत्रफल में दीवारों पर अद्वतीय चित्रकारी कर अत्यंत ही दर्शनीय बना दिया गया है।

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