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सारस गणना में इटावा के दोबारा बाजी मारने की उम्मीद

सारस गणना में इटावा के दोबारा बाजी मारने की उम्मीद

इटावा, 21 फरवरी (वार्ता) दुनिया के नामचीन वेटलैंड क्षेत्र में एक इटावा में उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस की गणना ने पर्यावरणविदों के साथ-साथ वन अफसरों को भी उत्साहित कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही हैं कि सारस गणना में बीहड़ क्षेत्र का यह जिला इस बार भी बाजी मार लेगा।

पिछले साल 20 दिसम्बर से सारस पक्षी की गणना शुरू की गयी थी जिसमें इटावा वन क्षेत्र के पांच रेंजो में बहुत अच्छे नतीजे रहे हैं। सरसईनावर में 245 सारस देखे गए है जो बहुत ही उत्साहजनक रही है। दूसरे वैटलैंड सरावा में सारस 57 मिले है इनमे 51 वयस्क ओर 6 उनके सारस के बच्चे मिले हैं। इस मौजूदगी को भी शुभ संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

इन सबके अलावा छोटे-छोटे वेटलैंड और एग्रीकल्चर फील्ड के इलाकों में भी सारस पक्षी देखे गए हैं। गणना के दौरान उनकी संख्या दर्ज कर ली गई है अब इस गणना को प्रदेश स्तर पर एकजुट करने का काम चल रहा है।

पर्यावरण संस्था सोसायटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के महासचिव डा.राजीव चौहान बताते हैं कि यह गणना सारस प्रोटेक्शन सोसाइटी और लखनऊ यूनिवर्सिटी के वाइल्ड लाइफ बिंग की ओर से सयुंक्त रूप से की गई है । 20 दिसंबर को यह गणना कराई गई है। इस गणना में इटावा और मैनपुरी के दर्जनों वेटलैंडो में बड़े पैमाने पर सारस पक्षी देखे गए हैं।

1999 से शुरू हुई सारस गणना में लगातार सारस पक्षी की संख्या में इजाफा होता चला जा रहा है । ऐसा माना जा रहा है कि इटावा और आसपास लोगों की सारस पक्षी के प्रति समर्पण और जागरूकता की भावना ने इनकी संख्या में खासा इजाफा किया हुआ है।

रामसर साइट में शामिल सरसई नावर वेटलैंड उत्तर प्रदेश का सारस पक्षी का सबसे बड़ा आशियाना उभर कर के सामने आता हुआ दिखाई दे रहा है। मैनपुरी जिले के एक दो वेट लैंडो को सारस पक्षी की गणना बहुत अच्छी देखी जा रही है जिसको एक तरह से शुभ संकेत की नजर से ही देखा जाएगा।

सरसईनावर को जैसे ही रामसर साइट में शामिल किया गया है वैसे ही यहां पर सारस पक्षी की संख्या में बड़ा इजाफा दिखाई देना कहीं ना कहीं इस ओर इशारा करता है कि सरसई नावर के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ेगा। इन घटनाओं को देखकर के ऐसा लगता है कि सारस पक्षी की जो संख्या इटावा में पहले रही है उसी तरीके की संख्या आगे भी रहेगी ।

1999 की सारस गणना मे 350 सारस पक्षी पाये गये थे जो देश के सबसे अधिक माने जाने से सरसईनावर झील एकाएक सुखिर्यो मे आ गयी थी ।

सारस दुनिया का सबसे बडा उडने वाला पक्षी है, जिसकी कुल 70 प्रतिशत आबादी यूपी में निवास करती है। इसके साथ ही देश के जम्बू काश्मीर, हिमांचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में भी कहीं कहीं यह निवास करते हैं ।

भारत के अलावा सारस नेपाल, पाकिस्तान, चाइना, म्यानमार, कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम व आस्ट्रेलिया में भी पाए जाते हैं । सैफई के निकट समान कटर वेटलेंड क्षेत्र पर सारस विश्व में सबसे अधिक संख्या में पाए जाते हैं। यही कारण है कि सैफई में विश्व स्तर की कान्फ्रेंस आयोजित की गई है।

1999 में हुई गणना के मुताबिक पूरे भारतीय उपमहादीप में सारसों की संख्या महज करीब 10000 आंकी गई । यह संख्या नई गणना मे 15 हजार के आसपास बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 में इटावा के सभी तालाबों,झाबरों को ऊसर सुघार योजना के तहत समाप्त किया जा रहा था तब इलाहबाद उच्च न्यायालय में बाइल्ड ट्रस्ट आफॅ इंडिया ने एक याचिका दायर कर इस परियोजना से तालाबों को होने वाले नुकसानों को रोकने की पहल की।

अमर प्रेम का प्रतीक सारस पक्षी ने दुनिया भर में इटावा जिले की पहचान करा रखी हैं। इटावा जिले के खेतों में घूमते देखे जाते सारस आम बात हैं। दुनिया में सबसे उंचा सारस उडने वाला पक्षी किसानों का मित्र हैं। करीब 12 किलो वजन वाले सारस की लम्बाई 1.6 मीटर तथा जीवनकाल 35 से 80 वर्ष तक होता है। सारस वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनूसूची में दर्ज हैं।

सं प्रदीप

वार्ता

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