Thursday, Jul 18 2019 | Time 20:48 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • पंजाब में निजी मैडीकल कॉलेजों में भी खिलाड़ियों, दंगा पीड़ितों को आरक्षण का फैसला
  • पत्रकारों के प्रवेश पर रोक को लेकर वित्त मंत्रालय से जवाब तलब
  • बहराइच में बाघ ने बनाया एक व्यक्ति को अपना शिकार
  • मुख्यमंत्री ने लगाई फीस वृद्धि पर रोक, छात्रों को देनी होनी पुरानी फीस
  • पुलिस अवर निरीक्षक रिश्वत लेते गिरफ्तार
  • दो लाख से अधिक श्रद्धालु पवित्र शिवलिंग का कर चुके दर्शन
  • प्रोन्नति के लिये यूपीजेईए का ‘सत्याग्रह’ छठे दिन भी जारी
  • प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा किया गया रखरखाव : प्रियव्रत
  • वैष्णो देवी हेलिकॉप्टर सेवा तीसरे दिन स्थगित
  • अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों के हमले में 35 सैनिक मारे गये
  • श्रीखंड यात्रा फिर से शुरू, पार्वती बाग से आगे जाने की अनुमति नहीं
  • तालाबंदी के विरोध में स्कूल बचाओ संघर्ष कमेटी ने लघु सचिवालय के बाहर किया प्रदर्शन
  • सिंधू क्वार्टरफाइनल में, श्रीकांत बाहर
  • बंगाली फिल्मों के कई कलाकार भाजपा में शामिल
  • चैम्पियन के पार्टी से निष्कासित मामले में हरक सिंह रावत ने साधी चुप्पी
राज्य


व्यवहारिक शिक्षा के पक्षधर थे स्वामी विवेकानंद : द्रौपदी

व्यवहारिक शिक्षा के पक्षधर थे स्वामी विवेकानंद : द्रौपदी

रांची 11 सितंबर (वार्ता) झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने आज कहा कि स्वामी विवेकानंद व्यवहारिक शिक्षा के पक्षधर थे और इसे मानव जीवन के लिए उपयोगी मानते थे।

श्रीमती मुर्मू ने स्वामी के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में हुए ऐतिहासिक उद्बोधन के 126 वर्ष पूर्ण होने पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबंधित करते हुये कहा कि स्वामी विवेकानंद व्यवहारिक शिक्षा के पक्षधर थे और इसे मानव जीवन के लिए उपयोगी मानते थे। वह ऐसी शिक्षा चाहते थे, जिससे युवाओं का शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास हो।

राज्यपाल ने कहा कि वह युवाओं के सर्वांगीण विकास के पक्षधर थे। वह ऐसी शिक्षा चाहते थे जो जनसाधारण को जीवन संघर्ष के लिए तैयार करें, उनका चरित्र निर्माण करें, उनमें समाज सेवा की भावना विकसित करें तथा जो शेर जैसा साहस पैदा करें। उनके कथन, ‘उठो, जागो और तब तक न रुको, जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाय’ युवाओं में नवसंचार की भावना प्रबल करता है।

सूरज रमेश

जारी (वार्ता)

image