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जीएसएलवी-एफ12 ने किया देश की दूसरी पीढ़ी के पहले नाैवहन उपग्रह एनवीएस-01 का सफल प्रक्षेपण

जीएसएलवी-एफ12 ने किया देश की दूसरी पीढ़ी के पहले नाैवहन उपग्रह एनवीएस-01 का सफल प्रक्षेपण

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 29 मई (वार्ता) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ-12 के जरिये देश की दूसरी पीढ़ी के पहले नौवहन उपग्रह एनवीएस-01 का सफल प्रक्षेपण किया।

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह 10:42 बजे 51.7 मीटर लंबा जीएसएलवी-एफ12 अपनी 15वीं उड़ान में दो हजार 232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-01 नौवहन उपग्रह को लेकर रवाना हुआ। प्रक्षेपण की उल्टी गिनटी 27.5 घंटे पहले रविवार सुबह सात बजकर 12 मिनट पर शुरू हो गयी थी।

प्रक्षेपण के लगभग 18 मिनट बाद उपग्रह प्रक्षेपण यान से अलग होकर जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित हो गया। एनवीएस-01 में पहली बार एक स्वदेशी परमाणु घड़ी को भी लगाया गया है। उपग्रह को अपेक्षित कक्षा में स्थापित करने के लिए कक्षा ऊपर उठाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने सफल प्रक्षेपण के बाद मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा, “जीएसएलवी-एफ12 मिशन के उत्कृष्ट परिणाम के लिए सभी को बधाई। मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ12 ने नौवहन उपग्रह एनवीएस-01 को अपेक्षित कक्षा में स्थापित कर दिया है। इस मिशन को पूरा करने के लिए पूरी टीम को बधाई।”

डॉ. सोमनाथ ने कहा कि जीएसएलवी-एफ12 का यह मिशन क्रायोजेनिक चरण में आयी समस्या के कारण जीएसएलवी-एफ10 मिशन के विफल होने के बाद सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। उन्होंने कहा, “हमने संशोधन किये और इससे सीखे गये सबक की बदौलत एलवीएम-एम3 मिशन तथा आज का मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।”

उन्होंने विफलता विश्लेषण समिति को भी धन्यवाद दिया, जिसने जीएसएलवी-एफ10 मिशन की विफलता के कारणों का पता लगाया और अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं।

उन्होंने कहा कि एनवीएस-01 दूसरी पीढ़ी का उपग्रह है, जिसमें अतिरिक्त क्षमताएं हैं, जो संकेतों को अधिक सुरक्षित बनाती हैं। यह नए विन्यास में उपग्रहों की उन पांच श्रृंखलाओं में से एक है, जिनके प्रक्षेपण की योजना बनायी गयी है।

इसरो प्रमुख ने कहा, “मैं आज के सफल मिशन के लिए सभी को धन्यवाद देता हूं।”

जीएसएलवी-एफ12 भारत के जीएसएलवी की 15वीं और स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के साथ नौवीं उड़ान है। यह इस वर्ष का पहला जीएसएलवी मिशन है।

वर्ष 2023 में इसरो का यह चौथा मिशन है। इससे पहले फरवरी में लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएसएलवी-डी2 की दूसरी विकासात्मक उड़ान का सफल प्रक्षेपण किया गया तथा मार्च में एलवीएम-एम3 मिशन और अप्रैल में पीएसएलवी-सी55 मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।एनवीएस-01 नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सटेलेशन (नाविक) की सेवाओं के लिए परिकल्पित दूसरी पीढ़ी के उपग्रहों में से पहला है। उपग्रहों की एनवीएस श्रृंखला उन्नत विशेषताओं के साथ नाविक को बढ़ावा देगी।

यामिनी

वार्ता

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