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गुजरात हाई कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 10 दिनों तक पुलिस हिरासत में देने को मंजूरी दी

गुजरात हाई कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 10 दिनों तक पुलिस हिरासत में देने को मंजूरी दी

अहमदाबाद, 11 सितंबर (वार्ता) गुजरात हाई कोर्ट ने लगभग दो दशक पहले कथित तौर पर होटल मेें अफीम रखवा कर राजस्थान के एक वकील को इस मामले में फंसाने और अगवा करने से जुड़े मामले में गिरफ्तार गुजरात कैडर के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट तथा एक अन्य पूर्व पुलिस अधिकारी को इस प्रकरण में आगे की पूछताछ के लिए आज 10 दिनों तक जांचकर्ता एजेंसी सीआईडी-क्राईम के विशेष जांच दल की हिरासत (रिमांड) में सौंपने को मंजूरी दे दी।

बनासकांठा जिले के तत्कालीन एसपी रहे श्री भट्ट तथा तब उनके मातहत स्थानीय अपराध शाखा यानी एलसीबी के इंस्पेक्टर रहे (अब सेवानिवृत्त) इंद्रवदन व्यास को इस मामले में गत पांच सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दोनो को छह सितंबर को बनासकांठा के जिला मुख्यालय पालनपुर की अदालत में पेश किया गया था पर अदालत ने बचाव पक्ष की यह दलील स्वीकार करते हुए कि यह मामला दो दशक से अधिक पुराना है और इससे संबंधित प्रकरण उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं, उन्हें रिमांड पर देने की अर्जी ठुकरा दी थी। सीआईडी क्राइम ने इसके बाद कल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आर पी धोलरिया की एकल पीठ ने आज 10 दिन के रिमांड की मंजूरी दे दी। हालांकि सीआईडी क्राइम ने 14 दिनों के रिमांड की मांग की थी। अदालत ने अभियोजन पक्ष की यह दलील स्वीकार कर ली कि श्री भट्ट और श्री व्यास की गिरफ्तारी हाई कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने किया है और इसकी आगे जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना जरूरी है।

राजस्थान के पाली के वकील शमशेरसिंह राजपुरोहित को मई 1996 में गुजरात के बनासकांठा की पुलिस ने पालनपुर के एक होटल से एक किलो अफीम की बरामदगी के मामले में पकड़ा था। पर होटल के मैनेजर ने उन्हें पहचाने से इंकार कर दिया जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। श्री राजपुरोहित ने बाद में राजस्थान में मामला दायर कर आरोप लगाया कि गुजरात हाई कोर्ट के तत्कालीन जज आर आर जैन के इशारे पर पुलिस ने उन्हें अगवा किया था ताकि जज की बहन की उस दुकान को डरा धमका कर खाली कराया जा सके जिसे उनके एक रिश्तेदार ने ले रखा था। राजस्थान की अदालत ने इस मामले में गुजरात पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया था। बाद में सेवानिवृत्त हो गये जज जैन ने 1998 में गुजरात हाई कोर्ट में एक मामला दायर कर पूरे प्रकरण की जांच करने की मांग की। उन्होंने राजस्थान की अदालत और पुलिस पर वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अधिवक्ता संघ के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था।

गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश आर बी पारडीवाला ने गत जून माह में इस मामले की तेजी से जांच करने के आदेश सीआईडी क्राइम को दिये थे। ज्ञातव्य है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गुजरात दंगों में पुलिस को दंगाइयों के प्रति नरम रूख अपनाने के आदेश देने के आरोप लगाने वाले श्री भट्ट के यहां स्थित आवास के अवैध रूप से निर्मित हिस्से को अदालत के आदेश पर पिछले माह ही गिराया गया था।

श्री मोदी और भाजपा के मुखर आलोचक रहे श्री भट्ट ने अपनी गिरफ्तारी से कुछ ही समय पूर्व यहां आमरण अनशन पर बैठे कांग्रेस समर्थित पाटीदार नेता हार्दिक पटेल से भी मिले थे।

उच्चतम न्यायालय ने हालांकि श्री भट्ट की ओर से श्री मोदी पर गुजरात दंगों को लेकर लगाये गये आरोपों को खारिज कर दिया था। श्री भट्ट को लंबी अनधिकृत गैरहाजिरी के चलते अगस्त 2015 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

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