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राधारानी का मंदिर खुलने पर सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

राधारानी का मंदिर खुलने पर सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

विदिशा, 06 सितंबर (वार्ता)मध्यप्रदेश के विदिशा में वर्ष भर के इंतजार के बाद राधाष्टमी पर आज राधारानी मंदिर के पट खुलने पर सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

राधारानी का यह मंदिर साल में केवल एक बार राधाष्टमी के दिन ही आम दर्शकों के लिए खोला जाता है।



उत्तरप्रदेश में बरसाना के वाद विदिशा जिला मुख्यालय पर 331 वर्ष प्राचीन देश का यह दूसरा राधारानी मंदिर है, जो आज आम भक्तों के लिए उत्सव पूर्ण वातावरण में खोला गया।

यह मंदिर विदिशा के नंदवाना मोहल्ले में स्थित है और मंदिर की गली का नाम वृंदावन गली है। जहा ,एक प्राचीन राधावल्लभीय हवेली में राधा की मूर्तियों की पूजा होती है। साल भर की पारम्परिक गुप्त पूजा के वाद आज हर वर्ष की तरह मंदिर में राधारानी का जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान फूलों का बंगला बनाकर उन्हें चंदन के सिंहासन पर विराजमान किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने राधारानी के दर्शन किये।

मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विष्णु प्रसाद स्वामी ने बताया कि राधावल्लभ सम्प्रदाय के एक परिवार द्वारा आज से 331 वर्ष पूर्व औरंगजेब द्वारा मन्दिरो पर किये जा रहे आक्रमण के दौरान बृन्दावन के जूघाट मंदिर के नष्ट होने पर राधारानी की प्रतिमा को सुरक्षित रखने हेतु बांस की टोकरी में छिपाकर पैदल चल कर विदिशा लाया गया था। मंदिर के पुजारी के मुताविक उस दौरान व्यापक पैमाने पर मुगल शासकों द्वारा मंदिरों की तोड़ फोड़ और मूर्तियों को नष्ट होने से इस प्रतिमा को पुजारी के परिवार द्वारा किसी मंदिर में न रखकर अपनी खंडहरनुमा प्राचीन हवेली में ही स्थापित कर गुप्त रूप से पूजा शुरू की गई। तब से ही यहां गुप्त पूजा का विधान शुरू हो गया।

इस हवेली का स्वरूप आज भी वैसा ही बना है, जहां गुप्त पूजा आज भी जारी है। यहां सालभर आने वाले भक्त मंदिर के बाहर से दर्शन करते है लेकिन कोई भी भक्त मंदिर के अंदर विराजमान राधारानी की झलक भी नही पा सकता। पुजारी के अनुसार राधावल्लभ सम्प्रदाय की इस गुप्त पूजा का रहस्य प्रतिमाओं की सुरक्षा करने का है। कालांतर में बढ़ती सुरक्षा व्यवस्था के बाद वर्ष में एक दिन राधाअष्टमी को मंदिर के पट आम दर्शकों के लिए खोले जाते हैं।

सं.व्यास

वार्ता

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