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भारतीय भाषाओं ने सहिष्णुता की भावना को जीवंत बनाये रखा है : अनिरुद्ध जगन्नाथ

भारतीय भाषाओं ने सहिष्णुता की भावना को जीवंत बनाये रखा है : अनिरुद्ध जगन्नाथ

(शिवाजी/अशोक उपाध्याय से)


गोस्वामी तुलसीदास नगर (मॉरिशस) 19 अगस्त (वार्ता) मॉरिशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने आज कहा कि हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं ने भारतीय संस्कृति से जुड़ी सच्चाई, भाईचारा, अहिंसा एवं दूसरे धर्म तथा संस्कृतियों के

प्रति सहिष्णुता की भावना आदि मूल्यों को जीवंत बनाये रखा है।

श्री जगन्नाथ ने 11 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में “ प्रवासी संसार : भाषा और संस्कृति” पर केंद्रित सातवां समानांतर सत्र

में कहा कि मॉरिशस की जीवन संस्कृति में रची-बसी भोजपुरी बोली, पूजा-पाठ एवं फिल्मों के माध्यम से हिंदी भाषा आगे

बढ़ी है। हिंदी में हस्ताक्षर कर सकने के कारण ही मॉरिशस के नागरिकों को वोट देने का अधिकार मिला। इसी के बल पर

मजदूरों के संतानों ने प्रधानमंत्री पद तक का सफर पूरा किया। उन्होंने कहा कि राजसत्ता को चुनौती देने का काम हिंदी

भाषा के माध्यम से ही किया जा सका।

सत्र के बीज वक्तव्य में प्रवासी संसार की व्यापकता पर विचार करते हुये हिंदी व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर प्रेम जनमेजय ने कहा कि प्रवासी देशों में भाषा और संस्कृति पहचान का सबसे सशक्त माध्यम है। बड़े यत्न से सहेजी गई विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवा लोगों में भाषा एवं संस्कृति को अपनाना आवश्यक है। इसके लिए युवा प्रवासी मैत्री मंचों की स्थापना की जानी चाहिए।

गयाना के हरिशंकर शर्मा ने अपने वक्तव्य में भारतीय संस्कृति में व्याप्त संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा और जीवन संस्कृति में संस्कारों के कारण ही आज भारतीय लोग जहां बस जाते हैं, वहां का मान बढ़ जाता है।

शिवा. उपाध्याय

जारी (वार्ता)

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