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किश्तवाड़ में 30 से अधिक ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार

किश्तवाड़ में 30 से अधिक ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार

जम्मू, 20 सितंबर (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों द्वारा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता के परिजनों को बंधक बनाये जाने तथा बाद में उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) की ए के 47 राइफल लेकर फरार होने के एक सप्ताह के बाद अब तक 30 से अधिक आतंकवादियों के मददगारों को गिरफ्तार किया गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को कहा,“ सेना और खुफिया एजेंसियों की टीमों के साथ सुरक्षा बलों ने बुधवार और गुरुवार को तलाशी अभियान शुरू किया गया था।” उन्होंने बताया कि बुधवार को खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गयी अलग-अलग छापेमारी के दौरान आतंकवादियों के मददगार को गिरफ्तार किया गया था जबकि गिरफ्तार लोगों के खुलासे के आधार पर गुरुवार को 24 से अधिक ओजीडब्ल्यू को हिरासत में ले लिया गया।

उन्होंने कहा, “ पूछताछ के दौरान गिरफ्तार ओजीडब्ल्यू के कई आतंकवादी संगठनों और आतंकवादियों के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध होने का भी खुलासा हुआ है।” सूत्रों ने कहा कि ‘मिशन किश्तवाड़’ के तहत तलाश एवं खोज अभियान जारी है और इसके तहत और गिरफ्तारियाें की भी संभावना है। उन्होंने कहा,“ कश्मीर घाटी से आतंकवादियों के किसी भी गतिविधि पर नज़र रखने के लिए सैनिकों ने किश्तवाड़ जिले की घेराबंदी कर रखी है।”

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को तीन आतंकवादियों ने पीडीपी नेता शेख नासिर के घर में घुसकर परिवार को बंधक बना लिया था। आतंकवादी शनिवार को श्री नासिर के पीएसओ की एके-47 राइफल लेकर मौके से फरार हो गए।

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा था कि यह लश्कर के आतंकवादी ओसामा की उसके साथी जाहिद और तीसरे अज्ञात की करतूत है।

आधिकारिक सूत्रों ने आगे कहा कि किश्तवाड़ जिले में मौजूदा स्थिति को देखते हुए विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर 36 क्लोज सर्किट कैमरे भी लगाए गए हैं।

उन्होंने कहा, “ सीसीटीवी लगाने की परियोजना 2005 में शुरू की गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इसे शुरू नहीं किया जा सका था लेकिन आखिरकार, इन्हें स्थापित किया जा रहा है। इनमें से कई कैमरों ने काम करना भी शुरू कर दिया है।”

संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म किये जाने के बाद किश्तवाड़ जिले में भी अतिरिक्त सुरक्षा बलों काे तैनात किया गया है।

एक दशक पहले किश्तवाड़ जिले को आतंकवाद-मुक्त घोषित किया गया था लेकिन हाल के दिनों में फिर से आतंकवादी गतिविधियों से शहर में हलचल मच गई है। नवंबर 2018 में भारतीय जनता पार्टी के नेता अनिल परिहार और उनके भाई अजीत परिहार की हत्या कर दी गयी थी जबकि गत नौ अप्रैल को किश्तवाड़ जिला अस्पताल के अंदर आरएसएस नेता चंद्रकांत शर्मा और उनके सुरक्षा गार्ड राजिंदर कुमार की हत्या कर दी गयी थी।

इस साल 31 मई को किश्तवाड़ में मारवाह बेल्ट के अप्पन इलाके में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में दो विशेष पुलिस अधिकारी घायल हो गए थे लेकिन आतंकवादी भागने में सफल रहे थे।

गत 24 जुलाई को, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी जमाल दीन ने किश्तवाड़ शहर में सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वह पिछले साल आतंकवादी संगठन में शामिल हुआ था।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने हाल ही में किश्तवाड़ का दौरा किया और सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की जबकि जम्मू आईजीपी ने भी स्थिति पर नजर रखने के लिए दो दिनों के लिए पर्वतीय जिले में डेरा डाला था।

संजय.श्रवण

वार्ता

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