Friday, Sep 21 2018 | Time 09:53 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • दक्षिण कश्मीर में कांस्टेबल और तीन एसपीओ का अपहरण
  • जापान और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता 24 सितंबर को
  • आज का इतिहास (प्रकाशनार्थ 22 सितंबर)
  • आबे और ट्रम्प 26 सितंबर को करेंगे शिखर बैठक
  • आबे और ट्रम्प 26 सितंबर को करेंगे शिखर बैठक
  • अमेरिका में गोलीबारी, चार की मौत, तीन घायल
  • तंजानिया में नाव पलटने से कम से कम 42 की मौत
  • तंजानिया में नाव पलटी,200 से अधिक लोगों के डूबने की आशंका
  • कांग्रेस हथकंडे अपनाने की बजाए मैदान में आकर लड़े चुनाव - राकेश
  • घोषणाएं पूरी भी करते हैं - शिवराज
  • अफगानिस्तान ने बंगलादेश भी शिकार कर डाला
  • बांध से पानी छोड़े जाने के कारण चार युवक फसे
मनोरंजन Share

कभी अलविदा ना कहना..

कभी अलविदा ना कहना..

..जन्मदिवस 04 अगस्त के अवसर पर ..

मुंबई 03 अगस्त(वार्ता)

.. बीच राह में दिलबर बिछड़ जाये कहीं हम अगर

और सूनी सी लगे तुम्हें जीवन की ये डगर

हम लौट आयेंगे तुम यूंही बुलाते रहना

कभी अलविदा ना कहना...

जिंदगी के अनजाने सफर से बेहद प्यार करने वाले हिन्दी सिने जगत के महान पार्श्वगायक किशोर कुमार का नजरिया उनके गाये इन पंक्तियों में समाया हुआ है। मध्यप्रदेश के खंडवा में 04 अगस्त 1929 को मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में अधिवक्ता कुंजी लाल गांगुली के घर जब सबसे छोटे बालक ने जन्म लिया तो कौन जानता था कि आगे चलकर यह बालक अपने देश और परिवार का नाम रौशन करेगा। भाई बहनो में सबसे छोटे नटखट आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार का रूझान बचपन से ही पिता के पेशे वकालत की तरफ न होकर संगीत की ओर था।

महान अभिनेता एवं गायक के.एल.सहगल के गानो से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह के गायक बनना चाहते थे। सहगल से मिलने की चाह लिये किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र में मुंबई पहुंचे। लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पायी। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे। अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रूप मे अपनी पहचान बनाये लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्व गायक बनने की चाह थी जबकि उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नही ली थी। जबकि बालीवुड में अशोक कुमार की पहचान के कारण उन्हें बतौर अभिनेता काम मिल रहा था।

अपनी इच्छा के विपरीत किशोर कुमार ने अभिनय करना जारी रखा। जिन फिल्मों में वह बतौर कलाकार काम किया करते थे उन्हें उस फिल्म में गाने का भी मौका मिल जाया करता था। किशोर कुमार की आवाज सहगल से काफी हद तक मेल खाती थी। बतौर गायक सबसे पहले उन्हें वर्ष 1948 में बाम्बे टाकीज की फिल्म जिद्दी में सहगल के अंदाज में ही अभिनेता देवानंद के लिये ..मरने की दुआएं क्यूं मांगू ..गाने का मौका मिला। किशोर कुमार ने वर्ष 1951 में बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म आन्दोलन से अपने करियर की शुरूआत की लेकिन इस फिल्म से दर्शकों के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके। वर्ष 1953 मे प्रदर्शित फिल्म लड़की बतौर अभिनेता उनके कैरियर की पहली हिट फिल्म थी। इसके बाद बतौर अभिनेता भी किशोर कुमार ने अपनी फिल्मों के जरिये दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया।

     किशोर कुमार ने 1964 में फिल्म ..दूर गगन की छांव में .. के जरिये निर्देशन के क्षेत्र मे कदम रखने के बाद हम दो डाकू, दूर का राही, बढ़ती का नाम दाढ़ी, शाबास डैडी, दूर वादियों में कही, चलती का नाम जिंदगी और ममता की छांव में जैसी कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। निर्देशन के अलावा उन्होंने कई फिल्मों में संगीत भी दिया जिनमें

झुमरू, दूर गगन की छांव में, दूर का राही, जमीन आसमान और ममता की छांव में जैसी फिल्में शामिल है। बतौर निर्माता किशोर कुमार ने दूर गगन की छांव में और दूर का राही जैसी फिल्में भी बनायीं।

किशोर कुमार को अपने कैरियर में वह दौर भी देखना पड़ा जब उन्हें फिल्मों में काम ही नहीं मिलता था। तब वह स्टेज पर कार्यक्रम पेश करके अपना जीवन यापन करने को मजबूर थे। बंबई में आयोजित एक ऐसे ही एक स्टेज

कार्यक्रम के दौरान संगीतकार ओ.पी.नैय्यर ने जब उनका गाना सुना तो वह भावविह्लल होकर कहा, महान प्रतिभायें तो अक्सर जन्म लेती रहती हैं लेकिन किशोर कुमार जैसा पार्श्वगायक हजार वर्ष में केवल एक ही बार जन्म लेता है। उनके इस कथन का उनके साथ बैठी पार्श्वगायिका आशा भोंसले ने भी सर्मथन किया।

वर्ष 1969 मे निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत की फिल्म आराधना के जरिये किशोर कुमार गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह बने लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के आरंभ के समय संगीतकार सचिन देव वर्मन चाहते थे सभी गाने किसी एक गायक से न गवाकर दो गायकों से गवाएं जाएं। बाद में सचिन देव वर्मन की बीमारी के कारण फिल्म आराधना में उनके पुत्र आर.डी.बर्मन ने संगीत दिया। ..मेरे सपनों की रानी कब आयेगी तू.. और ..रूप तेरा मस्ताना.. गाना किशोर कुमार ने गाया जो बेहद पसंद किया गया। रूप तेरा मस्ताना गाने के लिये किशोर कुमार को बतौर गायक पहला फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। इसके साथ ही फिल्म आराधना के जरिये वह उन ऊंचाइयों पर पहुंच गये जिसके लिये वह सपनों के शहर मुंबई आये थे।

हरदिल अजीज कलाकार किशोर कुमार कई बार विवादों का भी शिकार हुए। सन 1975 में देश में लगाये गये आपातकाल के दौरान दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का न्यौता मिला। किशोर कुमार ने पारिश्रमिक मांगा तो आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गायन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद पांच जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा ..दुखी मन मेरा सुनो मेरा कहना, जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना..।

       किशोर कुमार को उनके गाये गीतों के लिये आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। किशोर कुमार ने अपने सम्पूर्ण फिल्मी कैरियर मे 600 से भी अधिक हिन्दी फिल्मों के लिये अपना स्वर दिया। उन्होंने बंगला, मराठी, आसामी, गुजराती, कन्नड, भोजपुरी और उड़िया फिल्मों में भी अपनी दिलकश आवाज के जरिये श्रोताओं को भाव विभोर किया।

किशोर कुमार ने कई अभिनेताओ को अपनी आवाज दी लेकिन कुछ मौकों पर मोहम्मद रफी ने उनके लिये गीत गाये थे। इन गीतों में ..हमें कोई गम है तुम्हें कोई गम है मोहब्बत कर जरा नहीं डर, चले हो कहां कर के जी बेकरार,

भागमभाग, मन बाबरा निस दिन जाये, रागिनी है दास्तां तेरी ये जिंदगी, शरारत, और आदत हैं सबको सलाम करना, प्यार दीवाना 1972 शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद रफी किशोर कुमार के लिये गाये गीतों के लिये महज एक रुपया पारिश्रमिक लिया करते थे।

वर्ष 1987 में किशोर कुमार ने निर्णय लिया कि वह फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वापस अपने गांव खंडवा लौट जायेंगे। वह अक्सर कहा करते थे कि ..दूध जलेबी खायेंगे खंडवा में बस जायेंगे ..लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया। 13 अक्टूबर 1987 को किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया से विदा हो गये।

वार्ता

More News
गुलशन कुमार का किरदार निभायेंगे आमिर खान

गुलशन कुमार का किरदार निभायेंगे आमिर खान

20 Sep 2018 | 1:52 PM

मुंबई 20 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान सिल्वर स्क्रीन पर टी-सीरीज कंपनी के दिवंगत मालिक गुलशन कुमार का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं।

 Sharesee more..
बत्ती गुल मीटर चालू की स्क्रिप्ट से बेहद प्रभावित हुये शाहिद कपूर

बत्ती गुल मीटर चालू की स्क्रिप्ट से बेहद प्रभावित हुये शाहिद कपूर

20 Sep 2018 | 1:43 PM

मुंबई 20 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर का कहना है कि वह अपनी आने वाली फिल्म ‘बत्ती गुल मीटर चालू’ की स्क्रिप्ट से बेहद प्रभावित हुये थे।

 Sharesee more..
भारतीय सिनेमा जगत के युगपुरूष ताराचंद बड़जात्या

भारतीय सिनेमा जगत के युगपुरूष ताराचंद बड़जात्या

20 Sep 2018 | 1:29 PM

मुंबई 20 सितंबर(वार्ता) भारतीय सिनेमा जगत के युगपुरूष तारा चंद बड़जात्या का नाम एक ऐसे फिल्मकार के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने पारिवारिक और साफ सुथरी फिल्म बनाकर लगभग चार दशकों तक सिने दर्शकों केदिल में अपनी खास पहचान बनायी।

 Sharesee more..
दर्शकों के बीच खास पहचान बनायी करीना ने

दर्शकों के बीच खास पहचान बनायी करीना ने

20 Sep 2018 | 1:18 PM

मुंबई 20 सितंबर (वार्ता) बॉलीवुड में करीना कपूर को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने अभिनेत्रियों को फिल्मों में परंपरागत रूप से पेश किये जाने के तरीके को बदलकर अपने बिंदास अभिनय से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनायी।

 Sharesee more..
फिल्म इंडस्ट्री के बैडमैन के नाम से मशहूर हैं गुलशन ग्रोवर

फिल्म इंडस्ट्री के बैडमैन के नाम से मशहूर हैं गुलशन ग्रोवर

20 Sep 2018 | 1:08 PM

मुंबई 20 सितंबर (वार्ता) हिंदी फिल्म जगत में बैडमैन के नाम से मशहूर गुलशन ग्रोवर को एक ऐसे अभिनेता के रूप में शुमार किया जाता है जिन्होंने अपनी प्रतिभा के जरिये न सिर्फ बॉलीवुड में बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी सशक्त पहचान बनायी है।

 Sharesee more..
image