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फर्जी संस्था बीसीए के कारनामों की हो सीबीआई जांच : सीएबी

फर्जी संस्था बीसीए के कारनामों की हो सीबीआई जांच : सीएबी

पटना, 24 अगस्त (वार्ता) क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) ने निबंधन रद्द हो चुकी संस्था बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) पर फर्जी दावेदारी पेश कर खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने, जाली कागजात के आधार पर दूसरे राज्य के क्रिकेटरों को खेलने देने और उनसे पैसे उगाही करने का आरोप लगाते हुये बीसीए के इन कारनामों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की शुक्रवार को मांग की।

सीएबी के सचिव आदित्य वर्मा एवं बीसीए मीडिया कमेटी के पूर्व अध्यक्ष संजीव कुमार मिश्र ने यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार सरकार के निबंधन विभाग ने इस वर्ष 27 मार्च, 16 मई और 19 जुलाई को सूचना के अधिकार के तहत मांगे गये जवाब में बताया था कि विभाग ने बीसीए का निबंधन रद्द कर दिया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि निबंधन रद्द होने के बावजूद बीसीए ने उच्चतम न्यायालय की कमेटी के समक्ष हलफनामा दायर कर किस अधिकार से कह दिया कि वह लोढा कमेटी की सिफारिशों के अनुसार अपने संविधान में संशोधन कर चुका है।

उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद अपनी पहचान खो चुके बिहार के खिलाड़ियों को 18 वर्ष बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018-19 में एक बार फिर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा प्रायोजित प्रथम श्रेणी के सभी क्रिकेट मैच के साथ ही अन्य वर्गों में खेलने का मौका दिया है।

उन्होंने कहा, “हमारे पास पुख्ता सबूत है कि अन्य राज्यों के करीब 20 क्रिकेटर जाली आवासीय एवं जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर बीसीएस एवं इनके जिला क्रिकेट संघ को पैसे देकर बिहार से क्रिकेट खेलने आ चुके हैं। 30 अगस्त के बाद इन फर्जी खिलाड़ियों की सूची भी मीडिया को सौंप दी जाएगी।” उन्होंने कहा कि बीसीए को राज्य के होनहार क्रिकेटरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।

सूरज राज

जारी वार्ता

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