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राष्ट्रपिता गांधी की फिल्म बनी आकर्षण का केंद्र

पणजी, 21 नवंबर (वार्ता) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जयंती वर्ष में उनपर बनी फिल्मों की डिजिटल प्रस्तुति समेत कई अनोखी डिजिटल कृतियाँ यहाँ चल रहे 50वें अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है।
सूचना प्रसारण के सचिव अमित खरे और प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता सुभाष घई ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय अभिलेखागार और सूचना प्रसारण द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में सिनेमा के उद्भव विश्व सिनेमा और भारतीय सिनेमा के इतिहास के अतिरिक्त फ़िल्म समारोहों का इतिहास भी डिजिटल माध्यम से बहुत ही रोचक तरीके से बताया गया है और उसमे मल्टी मीडिया के माध्यम से तैयार किया गया है।
श्री खरे ने प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज की नई पीढ़ी अब इतिहास को डिजिटल माध्यम से जानना चाहती उसे ध्यान में रखते हुए हमने यह प्रदर्शनी तैयार की है ताकि आज लोग इस तरह भारतीय सिनेमा और अन्य भारतीय भाषाओं की फिल्मों के बारे में जानकारी मिल सके। आज जमाना टेक्नोलॉजी और नवाचार का है। इसका इस्तेमाल इस प्रदर्शनी में किया गया है। मसलन इसमे ऐसे मंडप बने है कि आप उसके भीतर खडे होकर हाथ हिलाए या मुस्कराए या कोई भाव भंगिमा व्यक्त करें तो स्वतः की आपकी फिल्म बन जाएगी। एक मण्डप में आप खड़े हों तो आपकी बारिश में भेजती हुई तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई देगी यानी अब बारिश की शूटिंग के लिए बारिश की जरूरत नही। यह सब काम इस प्रदर्शनी में बखूबी दिखाया गया है। इस प्रदर्शनी में 17 इंस्टालशन्स हैं जिनमे सिनेमा का उद्भव और उसका विकड बताया गया है। इसमे मुख्यद्वार पर एलईडी का एक प्रवेश द्वार है। पुरानी फिल्मों के दुर्लभ पोस्टर स्वर्ण मयूर पुरस्कार विजन के फोटो के अलावा दर्शक खुद पुरस्कार लेते हुए अपनी तस्वीर को खिंचवा सकते है। 360 डिग्री का एक डिजिटल जोन है जिसमे खड़े होने पर आपकी फोटो मेल से आ जायेगी।
अरविंद, शोभित
वार्ता
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