Saturday, Jan 25 2020 | Time 18:53 Hrs(IST)
image
BREAKING NEWS:
  • करीब साढ़े 12 सौ लोग विभिन्न पदकों से अलंकृत
  • भाजपा की सीएए, एनआरसी के माध्यम से विभाजनकारी नीति: रंधावा
  • नडाल प्री क्वार्टरफाइनल में, दूसरी सीड प्लिसकोवा भी बाहर
  • नेतन्याहू ने 71 वें गणतंत्र दिवस पर मोदी को दी बधाई
  • सीबीआई के 28 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुलिस पदक
  • नागपुर में युवक की पत्थर से कुचल कर हत्या
  • हिमाचल थीम राज्य के रूप में भाग लेगा सूरजकुंड मेले में
  • यूएमसी ने केनरा बैंक की तीन शाखाओं को किया सील
  • पुणे में चुंगी के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
  • गत्ता फैक्ट्री में लगी आग
  • मतदाताओं की जागरूकता ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला : द्रौपदी
  • इनेलो में टूट थम नहीं रही है, कैथल जिलाध्यक्ष कांग्रेस में शामिल
  • अफगानिस्तान में सात तालिबानी आतंकवादी ढेर
  • भाजपा का गौरक्षा का नारा और दावा झूठाः हुड्डा
राज्य » गुजरात / महाराष्ट्र


बेहतर प्रदर्शन के लिए कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई जरूरी नहीं: प्रकाश झा

पणजी, 24 नवंबर (वार्ता) मशहूर फिल्म निर्माता प्रकाश झा ने कहा है कि उन्होंने अपनी नयी फिल्म ‘परीक्षा’ में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि यह जरुरी नहीं है कि कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ा लिखा छात्र ही अच्छा प्रदर्शन करेगा।
प्रकाश झा ने यूनीवार्ता से बातचीत करते हुए कहा “उनकी इस फिल्म में एक संदेश है कि यह जरुरी नहीं है कि कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ा लिखा छात्र ही बेहतर प्रदर्शन कर सकता है, हमारे समाज की यह धारणा है कि बच्चे को एक अच्छे कॉन्वेंट स्कूल में प्रवेश लेना चाहिए क्याेंकि उन स्कूलों में ही सब कुछ संभव है। यह फिल्म इसी परिपेक्ष्य में बनाई गई है और यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि ऐसा कुछ नहीं है और इस बात को अभिनेता संजय सूरी ने अपनी भूमिका से बखूबी साबित किया है।”
उन्होंने कहा “ फिल्म में दिखाया गया है कि केवल सत्य और ईमानदारी की जीत होती है। फिल्म में एक बच्चा अपने पिता को सिखाता है कि सच अपने आप में बहुत बड़ी चीज है।”
करीब 14 फीचर फिल्मों का निर्माण - निर्देशन करने वाले तथा 25 से अधिक डॉक्यूमेंटरी फिल्म बनाने वाले दस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रकाश झा को उम्मीद है कि लोग इस फिल्म को पसंद करेंगे।
उन्होंने कहा “मुझे आशा है कि लोग इस फिल्म को पसंद करेंगे। यह फिल्म एक गरीब और असहाय पिता पर आधारित है जो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। वह अपने लड़के के सपने पूरा करने के लिए कठिन परिश्रम करता है। लड़के की माँ हमेशा अपने बेटे की पढ़ाई के बारे में सोचती है। वे जानते है कि अगर उनकी जिंदगी में कोई सुधार आयेगा ताे उनके बच्चे की पढ़ाई से आयेगा। फिल्म की कहानी इस बात पर आधारित है कि एक पिता अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए किस हद तक जा सकता है।
आईएफएफटी के 50वें संस्करण में भारतीय पैनोरमा (फीचर फिल्म्स) में फिल्म ‘परीक्षा’ को दिखाया जा रहा है।
उप्रेती जितेन्द्र
वार्ता
image