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अपने रचित गीतों से देश भक्ति के जज्बे को बुंलद किया कवि प्रदीप ने

( पुण्यतिथि 11 दिसंबर के अवसर पर )
मुंबई10 दिसंबर (वार्ता) भारतीय सिनेमा जगत में वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिये कई गीतों की रचना हुयी है लेकिन देश प्रेम की भावना से ओप प्रोत रामचंद्र द्विवेदी उर्फ कवि प्रदीप के ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंखो मे भर लो पानी ,जो शहीद हुये हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी’गीत बेमिसाल है।
वर्ष 1962 मे जब भारत और चीन का युद्व अपने चरम पर था तब कवि प्रदीप परम वीर मेजर शैतान सिंह की बहादुरी और बलिदान से काफी प्रभावित हुये और देश के वीरों को श्रद्धाजंलि देने के लिये उन्होंने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों जरा याद करो कुर्बानी’गीत की रचना की। सी.रामचंद्र के संगीत निर्देशन मे एक कार्यक्रम के दौरान स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से देश भक्ति की भावना से परिपूर्ण इस गीत को सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की आंखो में आंसू छलक आये थे। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों ’आज भी भारत के महान देशभक्ति गीत के रूप मे याद किया जाता है ।
06 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के छोटे से शहर मे मध्यम वर्गीय बाह्मण परिवार में जन्में प्रदीप को बचपन के दिनों से ही हिन्दी कविता लिखने का शौक था जिसे वह कवि सम्मेलनों में पढ़कर सुनाया करते थे। वर्ष 1939 में लखनउ विश्वविद्यालय से स्नातक तक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने शिक्षक बनने का प्रयास किया लेकिन इसी दौरान उन्हें मुंबई में हो रहे एक कवि सम्मेलन में हिस्सा लेने का न्योता मिला। कवि सम्मेलन में उनके गीतों को सुनकर बाम्बे टॉकीज
स्टूडियो के मालिक हिंमाशु राय काफी प्रभावित हुये और उन्होंने प्रदीप को अपने बैनर तले बन रही फिल्म ‘कंगन’ के गीत लिखने की पेशकश की । वर्ष 1939 मे प्रदर्शित इस फिल्म में उनके गीतों की कामयाबी के बाद प्रदीप बतौर गीतकार फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गये। इस फिल्म के लिये लिखे गये चार गीतों में से प्रदीप ने तीन गीतों को अपना स्वर भी दिया था ।
वर्ष 1940 मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था। देश को स्वतंत्र कराने के लिय छिड़ी मुहिम में कवि प्रदीप भी शामिल हो गये और इसके लिये उन्होनें अपनी कविताओं का सहारा लिया। कविताओं के माध्यम से प्रदीप देशवासियों मे जागृति पैदा किया करते थे। वर्ष 1940 मे ज्ञान मुखर्जी के निर्देशन मे उन्होंने फिल्म ‘बंधन’के लिय भी गीत लिखा। यूं तो फिल्म बंधन मे उनके रचित सभी गीत लोकप्रिय हुये लेकिन ‘चल चल रे नौजवान ’के बोल वाले
गीत ने आजादी के दीवानों में एक नया जोश भरने का काम किया।अपने गीतों को प्रदीप ने गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और उनके गीतो ने अंग्रेजों के विरूद्व भारतीयों के संघर्ष को एक नयी दिशा दी ।
प्रेम आशा
जारी वार्ता
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