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‘जय भीम’ सिर्फ एक शब्द नहीं,बल्कि एक भावना है: ग्नानवेल

पणजी 28 नवंबर (वार्ता) तमिल फिल्म ‘जय भीम’ के निर्देशक टी जे ग्नानवेल ने कहा कि ‘जय भीम’ सिर्फ एक शब्द नहीं है, बल्कि एक भावना है। इस फिल्म को दर्शकों ने खूब सराहा है, जिसके लिए उन्हें अपार प्रसन्नता हुई।
निर्देशक ग्नानवेल ने फिल्म महोत्सव के दौरान आयोजित ‘वार्ता सत्र’ में मीडिया और इस महोत्सव में शामिल प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “मेरे लिए जय भीम शब्द शोषित और हाशिये पर रहने वाले लोगों का पर्याय है, जिनके हितों के लिए डॉ. बी. आर. अम्बेडकर हमेशा खड़े रहे।”
लेखक ग्नानवेल ने कहा कि इस फिल्म में सार्वभौमिक विषय को उठाया गया है। इसलिए, इस फिल्म से दर्शकों ने जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने कहा कि वह अपनी फिल्म के माध्यम से यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई में संविधान ही असली हथियार है।
जय भीम ज्वलंत मुद्दों पर आधारित फिल्म है, जिसमें जनजातीय दम्पती राजाकुन्नू और सेनगनी के जीवन व संघर्षों को दर्शाया गया है। यह दम्पती ऊंची जाति वाले लोगों की मनमानी और इच्छा के अनुसार जीने पर बाध्य हैं। ये उनके यहां घरेलू कामकाज करते हैं। फिल्म बनाने की कड़वी शैली उस समय नजर आती है, जब राजाकुन्नू को ऐसे अपराध के लिये गिरफ्तार कर लिया जाता है, जो उसने किया ही नहीं। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह ताकतवर लोग, कमजोर वर्ग के लोगों को अपमानित करते हैं, उन पर जुल्म करते हैं। सामाजिक बदलाव में सिनेमा की भूमिका के बारे में निर्देशक ग्नानवेल ने कहा कि वैसे फिल्म में एक मसीहा है, जो शोषित लोगों के लिये लड़ता है, लेकिन उनकी फिल्म का संदेश महान विद्वान बी.आर. अम्बेडकर के विचारों को साझा करती है कि शिक्षा ही एकमात्र जरिया है, जिससे लोग अधिकार-सम्पन्न हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “वास्तविक जीवन में कोई महानायक नहीं होता। शिक्षा के जरिये शक्तिसम्पन्न बनकर व्यक्ति खुद अपना महानायक बनता है। मेरी फिल्म का उद्देश्य उसी समय पूरा होगा जब सारे शोषित अधिकार-सम्पन्न हो जायेंगे।”
यह फिल्म न्यायमूर्ति के. चंद्रू के जीवन की असली घटना पर आधारित है, जिन दिनों वे वकालत करते थे। उनकी भूमिका प्रसिद्ध अभिनेता सूर्या ने निभाई है।
आईएफएफआई-53 में ‘जय भीम’ की स्क्रीनिंग इंडियन पैनोरमा फीचर फिल्म सेक्शन के तहत की गई। भारतीय फिल्म निर्देशक और लेखक ग्नानवेल तमिल फिल्म उद्योग में काफी प्रसिद्ध हैं और उन्हें ‘जय भीम’ फिल्म से ज्यादा पहचान मिली है। उनके निर्देशन की पहली फिल्म कूटथिल ओरुथन (2017) थी। 2डी एंटरटेनमेंट एक पुरस्कार विजेता भारतीय फिल्म निर्माण और वितरण कंपनी है, जिसमें अभिनेता, निर्माता और प्रस्तुतकर्ता सूर्या ने राजशेखर पांडियन, ज्योतिका और कार्थी के साथ कई ब्लॉकबस्टर हिट किए हैं।
निर्देशक ग्नानवेल ने कहा कि उन्हें परम्परा से अलग हटकर कुछ नया करना था। उन्होंने कहा कि आईएफएफआई-53 के प्रतिनिधियों को एक फिल्म के बजाय, एक भावना की स्क्रीनिंग से प्रेरित होने का एक अनूठा अवसर मिला।
श्रद्दा.संजय
वार्ता
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