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मनोरंजन-समीर जन्मदिन दो अंतिम मुंबई

वर्ष 1997 में अपने पिता अंजान की मौत और अपने मार्गदर्शक गुलशन कुमार की हत्या के बाद समीर को गहरा सदमा पहुंचा।उन्होंने कुछ समय तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया और वापस बनारस चले गये. लेकिन उनका मन वहां भी नहीं लगा और एक बार फिर नये जोश के साथ वह मुंबई आ गये और 1999 में प्रदर्शित फिल्म ..हसीना मान जायेगी ..से अपने सिने कैरियर की दूसरी पारी की शुरूआत कर दी।समीर ने अपने सिने करियर में लगभग 500 हिंदी फिल्मों के लिये गीत लिखे। उनके फिल्मी सफर पर नजर डालने पर पता लगता है कि उन्होंने सबसे ज्यादा फिल्में संगीतकार नदीम श्रवण और आनंद मिलिंद के साथ ही की है। यूं तो समीर ने कई अभिनेताओं के लिये गीत लिखे लेकिन अभिनेता गोविन्दा पर फिल्माये उनके गीत काफी लोकप्रिय हुए।
वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म ..स्वर्ग..में अपने गीतों की कामयाबी के बाद उन्होंने गोविन्दा के लिये कई फिल्मों के गीत लिखे।इन फिल्मों में राजा बाबू,हीरो नंबर वन,हसीना मान जायेगी,साजन चले ससुराल, बडे मियां छोटे मियां,राजा जी,जोरू का गुलाम,हीरो नंबर वन,दुल्हे राजा,आंटी नंबर वन,शिकारी और भागम भाग जैसी फिल्में शामिल हैं।समीर को अब तक तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।सबसे पहले उन्हें 1990 में फिल्म आशिकी के ..नजर के सामने जिगर के पास..गाने के लिये सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।इसके बाद 1992 में फिल्म दीवाना के गीत ..तेरी उम्मीद तेरा इंतजार करते है.. और 1993 में फिल्म हम हैं राही प्यार के के गीत ..घूंघट की आड़ से दिलबर का दीदार अधूरा लगता है..के लिये भी उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया।
समीर ने अपने करियर में लगभग छह हजार फिल्मी और गैर फिल्मी गाने लिखे है।उन्होंने हिन्दी के अलावा भोजपुरी.मराठी फिल्मों के लिये भी गीत लिखे है। समीर का नाम सबसे अधिक गीत लिखने के लिये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की किताब में दर्ज है।समीर आज भी उसी जोशोखरोश के साथ फिल्म जगत को सुशोभित कर रहे है।
प्रेम
वार्ता
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