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66 वर्ष के हुये समीर

मुंबई, 24 फरवरी (वार्ता) बॉलीवुड के जानेमाने गीतकार समीर आज 66 वर्ष के हो गये।
शीतला पांडेय उर्फ समीर का जन्म 24 फरवरी 1958 को बनारस में हुआ। उनके पिता अंजान फिल्म जगत के मशहूर गीतकार थे। बचपन से ही समीर का रूझान अपने पिता के पेशे की ओर था। वह भी फिल्म इंडस्ट्री में गीतकार बनना चाहते थे लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह अलग क्षेत्र में अपना भविष्य बनायें। समीर ने बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढाई पूरी की। इसके बाद परिवार के जोर देने पर उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत बतौर बैंक ऑफिसर शुरू की। बैंक की नौकरी उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं थी। कुछ दिनों के बाद उनका मन इस काम से उचट गया और उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
अस्सी के दशक में गीतकार बनने का सपना लिये समीर ने मुंबई की ओर रूख कर लिया। लगभग तीन वर्ष तक मुंबई में रहने के बाद वह गीतकार बनने के लिये संघर्ष करने लगे। आश्वासन तो सभी देते रहे लेकिन उन्हें काम करने का अवसर कोई नहीं देता था। अथक परिश्रम करने के बाद 1983 में उन्हें बतौर ..बेखबर .. फिल्म के लिये गीत लिखने का मौका मिला। इस बीच समीर को इंसाफ कौन करेगा,जवाब हम देगें,दो कैदी,रखवाला, महासंग्राम,बीबी हो तो ऐसी,बाप नंबरी बेटा दस नंबरी जैसी कई बड़े बजट की फिल्मों में काम करने का अवसर मिला लेकिन इन फिल्मों की असफलता के कारण वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में नाकामयाब रहे।
लगभग दस वर्ष तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद वर्ष 1990 में आमिर खान-माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म ..दिल ..में अपने गीत ..मुझे नींद ना आये.. की सफलता के बाद समीर गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये।वर्ष 1990 में ही उन्हें महेश भट्ट की फिल्म ..आशिकी ..में भी गीत लिखने का अवसर मिला। फिल्म आशिकी ने ..सांसो की जरूरत है जैसे. मैं दुनिया भूला दूंगा और नजर के सामने जिगर के पास.. गीतों की सफलता के बाद समीर को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये जिनमें बेटा,बोल राधा बोल, साथी, और फूल और कांटे जैसी बड़ी बजट की फिल्में शामिल थी।इन फिल्मों की सफलता के बाद उन्होंने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक गीत लिखकर श्रोताओं को मंत्रमुंग्ध कर दिया।
प्रेम
जारी वार्ता
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