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जिंदगी के अनजाने सफर से बेहद प्यार करते थे इंदीवर

मुंबई, 27 फरवरी (वार्ता)
'जिंदगी से बहुत प्यार हमने किया,
मौत से भी मोहब्बत निभाएंगे हम
रोते रोते जमाने में आए मगर
हंसते हंसते जमाने से जाएंगे हम'।
जिंदगी के अनजाने सफर से बेहद प्यार करने वाले हिन्दी सिने जगत के मशहूर शायर और गीतकार इंदीवर का जीवन से प्यार उनकी लिखी हुई इन पंक्तियों में समाया हुआ है।
श्यामलाल बाबू राय उर्फ इंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी में 1924 में हुआ था। बचपन से ही वह गीतकार बनने का सपना देखा करते थे और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई आ गए। बतौर गीतकार सबसे पहले 1946 में प्रदर्शित फिल्म 'डबल क्रॉस' में उन्हें काम करने का मौका मिला, लेकिन फिल्म की असफलता से वह कुछ खास पहचान नहीं बना पाए। अपने वजूद को तलाशते इंदीवर को गीतकार के रूप में पहचान बनाने के लिए लगभग पांच वर्ष तक फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने कई बी और सी ग्रेड की फिल्मे भी की।
वर्ष 1951 मे प्रदर्शित फिल्म 'मल्हार' की कामयाबी से वह गीतकार के रूप में कुछ हद तक वह अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। इस फिल्म का गीत 'बड़े अरमानो से रखा है बलम तेरी कसम' श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है। वर्ष 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की संगीतमय फिल्म 'पारसमणि' की सफलता के बाद इंदीवर शोहरत की बुंलदियो पर जा पहुंचे । इंदीवर की जोड़ी निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार के साथ बहुत जमी। मनोज कुमार ने सबसे पहले उनसे फिल्म 'उपकार' के लिढ गीत लिखने की पेशकश की। कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में उपकार के लिए इंदीवर ने 'कस्मेवादे प्यार वफा' जैसे दिल को छू लेने वाले गीत लिखकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।इसके अलावा मनोज कुमार की फिल्म पूरब और पश्चिम के लिए भी उन्होंने 'दुल्हन चली वो पहन चली' और 'कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे' जैसे सदाबहार गीत लिखकर अलग ही समां बांधा। वर्ष 1970 मे विजय आनंद निर्देशित फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' में 'नफरत करने वालो के सीने में प्यार भर दूं', 'पल भर के लिए कोई मुझे प्यार कर ले' जैसे रूमानी गीत लिखकर इंदीवर ने श्रोताओ का दिल जीत लिया।
प्रेम
जारी वार्ता
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