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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में दो लोगों को आजीवन कारावास

मुंबई, 10 मई (वार्ता) महाराष्ट्र में विशेष गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए अदालत) ने अगस्त 2013 में पुणे में चिकित्सक और तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की सनसनीखेज दिनदहाड़े हत्या के मामले में शुक्रवार को दो लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जबकि तीन अन्य को बरी कर दिया।
पुणे की विशेष अदालत के न्यायाधीश पी. पी. जाधव ने शरद बी.कालस्कर और सचिन पी.अंदुरे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उनमें से प्रत्येक पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायाधीश ने 11 साल पुराने मामले में बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए अपने आदेश में तीन अन्य आरोपियों संजीव पुन्हालेकर, ईएनटी सर्जन डॉ. वीरेंद्र तावड़े और विक्रम भावे को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
महाराष्ट्र अंधविश्वास उन्मूलन समिति के संस्थापक श्री दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को पुणे में दो बाइक सवार हमलावरों ने हत्या कर दी थी। उस समय वह सुबह की सैर पर निकले थे।
श्री दाभोलकर ने अंधविश्वासों, नकली बाबाओं/महिलाओं, बाबाओं, तांत्रिकों आदि के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था।
श्री दाभोलकर के बच्चों, हामिद और मुक्ता ने कहा कि उन्हें राहत है कि हत्यारों को दंडित किया जा रहा है, लेकिन वे अन्य लोगों को बरी करने के फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
मामले की जांच पुणे पुलिस, अपराध शाखा और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) सहित कई एजेंसियों द्वारा की गई थी।
सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि फैसले ने संगठन को श्री दाभोलकर की हत्या में किसी भी तरह की संलिप्तता से बरी कर दिया है।
उन्होंने कहा ''डॉ. दाभोलकर की हत्या में आज हमारी बेगुनाही साबित हो गई है। इसने सनातन संस्था को बदनाम करने की 'शहरी नक्सलियों' की साजिश का भी भंडाफोड़ किया है।
महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा हिंदू समूहों की संलिप्तता की ओर इशारा करने वाले दावों के बाद सरकार ने हिंदू वकालत संगठनों पर शिकंजा कस दिया था।''
प्रारंभ में, मामले की जांच डेक्कन पुलिस स्टेशन और बाद में पुणे सिटी क्राइम ब्रांच द्वारा की गई थी, लेकिन बहुत कम या कोई प्रगति नहीं होने पर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मई 2014 में इसे सीबीआई को सौंप दिया।
सीबीआई ने शिकायत दर्ज कर अपनी जांच शुरू की और सनातन संस्था के साथ कथित संबंधों वाले हत्या के पीछे कथित मास्टरमाइंड के रूप में डॉ. तावड़े की पहचान की।
जांगिड़
वार्ता
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