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विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक अधिकार: बॉम्बे हाई कोर्ट

मुंबई, 05 जून (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक मामले में कहा है कि विदेश यात्रा के अधिकार को देश के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है।
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक मामले में गवाह को थोड़े समय के लिए अमेरिका और ब्रिटेन जाने की अनुमति देते हुए अपने आदेश में यह बात कही।
न्यायमूर्ति कमल खाता और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की अवकाश पीठ ने गवाह संजय डांगी को 06 जून से 23 जून तक अमेरिका और ब्रिटेन की यात्रा करने की अनुमति दी।
एनडीएसआई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रमोटर डांगी को सीबीआई ने वधावन प्रवर्तित दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) से जुड़े कथित घोटाले की जांच में गवाह के रूप में बुलाया था। ऑथम इन्वेस्टमेंट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ पंजीकृत है और इसकी कुल संपत्ति 9,500 करोड़ रुपये है।
पीठ ने अनुमति देते हुए डांगी के खिलाफ सीबीआई द्वारा जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) को भी 24 जून तक निलंबित कर दिया।
डांगी की ओर से पेश समक्ष याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता का नाम सीबीआई मामले में दायर आरोपपत्र में नहीं है और वास्तव में उसे गवाह के रूप में साक्ष्य देने के लिए एजेंसी द्वारा बुलाया गया था। इसके अलावा उन्हें पांच मौकों पर विदेश यात्रा की अनुमति दी गई थी और उन्होंने कभी भी अपने ऊपर लगाई गई शर्तों का उल्लंघन नहीं किया।
जांगिड़ अशोक
वार्ता
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