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डाॅ महापात्रा ने कहा कि खेती के लाभदायक नहीं होने के कारण किसान भी अपने बच्चों को डाक्टर और इंजीनियर बनाना चाहते हैं और इसके लिए वे निजी संस्थानों में अधिक राशि खर्च कर बच्चों को पढाते हैं। उन्होंने सवाल किया किया वर्ष 2050 तक देश की आबादी 1.6 अरब हो जायेगी और कृषि को लेकर ऐसी ही सोच बनी रही तो इतनी बड़ी आबादी की खाद्य और पोषण सुरक्षा का क्या होगा ।
महानिदेशक ने कहा कि सरकार एक निश्चित समय सीमा के अंदर कृषि में युवाओं की भागीदारी 10 से 20 प्रतिशत करना चाहती है और इसके लिए कई कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं। कृषि में कौशल विकास के अलावा कृषि विश्विवद्यालयों और कृषि विज्ञान केन्द्रों में अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। ‘ आर्या ’ कार्यक्रम के तहत युवाओं के लिये गांवों में कृषि प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलाया जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में परम्परागत खेती की जा रही है जिसमें परिवर्तन की जरुरत है । खेती में मशीनों का उपयोग बढाने तथा अंतरिक्ष विज्ञान की मदद लिए जाने की जरुरत है जिससे उत्पादकता में वृद्धि हो । इसके साथ ही बाजार व्यवस्था को वैज्ञानिक बनाने तथा खेती के क्षेत्र में संचार माध्यमों का भरपूर इस्तेमाल किये जाने की जरुरत है ।
अरुण अर्चना
वार्ता
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