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यूएनओडीसी ने एजुकेशन 4 जस्टिस के लिए वर्ल्डव्यू से की भागीदारी

नयी दिल्ली 04 सितंबर (वार्ता) यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (यूएनओडीसी) ने स्कूलों में एजुकेशन फॉर जस्टिस (ई4जे) को प्रचारित प्रसारित करने के लिए वर्ल्डव्यू एजुकेशन के साथ करार किया है।
यूएनओडीसी ने अपने रीजनल ऑफिस ऑफ साउथ एशिया (यूएनओडीसी-आरओएसए) के जरिये यह करार किया है। यूएनओडीसी की पहल एजुकेशन फॉर जस्टिस को दोहा घोषणा पत्र में वैश्विक प्रोग्राम के तौर पर लागू करने के लिए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं के बीच आपराधिक न्याय, अपराध निवारण और कानून के शासन से संबंधित विषयों तथा सभी शिक्षा स्तरों के पाठ्यक्रम में उन सामग्रियों के एकीकरण के आधार पर आयु-उपयुक्त शैक्षणिक सामग्री के माध्यम से कानून के पालन की संस्कृति विकसित करना है। एजुकेशन फॉर जस्टिस ने वर्ष 2017 में मॉडल संयुक्त राष्ट्र (एमयून) कॉन्फ्रेंस में अपराध निवारण, आपराधिक न्याय और कानूनी पहलुओं से जुड़े अन्य नियमों को शामिल करने के लिए एक रिसोर्स गाइड बनाई।
वर्ल्डव्यू ने मंगलवार को यहां जारी बयान में यह जानकारी देते हुये कहा कि देश के 800 से ज्यादा स्कूल हर साल मॉडल यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस का आयोजन करते हैं या उसमें भाग लेते हैं। उनका मानना है कि यह स्कूल और उनके छात्र स्कूलों में एसडीजी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए एंबेसडर बन सकते हैं। उसने कहा कि इसको आगे बढ़ाते हुए यूएनओडीसी और वर्ल्डव्यू एजुकेशन फॉर जस्टिस को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु में गोलमेच सम्मेलन और कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं जिसमें स्कूलों प्रधानाध्यापक और एमयूएन एजुकेटर्स भाग ले रहे हैं। इसमें यूएनओडीसी मुख्यालय के अपराध निवारण और आपराधिक न्याय अधिकारी गिल्बर्टो दुअर्ते, यूएनओडीसी (आरओएसए) के संचार अधिकारी समर्थ पाठक और वर्ल्डव्यू एजुकेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समपृथ रेड्डी गोलमेज सम्मेलन को संबोधित कर रहे हैं।
शेखर
वार्ता
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गुरुदेव का कृतित्व, सन्देश आज भी प्रासंगिक : मोदी

गुरुदेव का कृतित्व, सन्देश आज भी प्रासंगिक : मोदी

18 Feb 2019 | 8:54 PM

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृति को राष्ट्र की प्राण वायु बताया और कहा है कि गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर का कृतित्व और उनका सन्देश समय और काल से परे है और दुनिया की वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए वह आज भी प्रासंगिक है।

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