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श्री वाजपेयी के निधन के कारण 18 एवं 19 अगस्त को नयी दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को टाल दिया गया था जो शनिवार एवं रविवार को यहीं होगी। बैठक में राजनीतिक, समसामयिक और आर्थिक प्रस्ताव पारित होंगे। बैठक का समापन रविवार शाम प्रधानमंत्री के संबोधन के साथ होगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार अगस्त में होने वाली कार्यकारिणी के राजनीतिक एजेंडे में संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण कानून को कठोर बनाने के कदम को लेकर देश भर में राजनीतिक आंदोलन छेड़ने की रूपरेखा तैयार करना था। लेकिन राजस्थान एवं मध्यप्रदेश सहित कुछ राज्यों में सवर्णों के अनेक संगठनों ने नये अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण कानून के खिलाफ एक अप्रत्याशित आंदोलन खड़ा कर दिया। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा और कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों में सवर्णों का विरोध हिंसक रूप लेने लेने से राजनीतिक क्षेत्र में बेचैनी छा गयी है।
सूत्रों के अनुसार इससे भाजपा को अपने एजेंडे में थोड़ा सा बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा। नयी रणनीति के अनुसार पार्टी दलित समर्थक छवि के साथ सवर्णों को जोड़े रखने का प्रयास करेगी और सामाजिक समरसता की रणनीति नहीं बदलेगी। बैठक में देश के अनुसूचित जाति एवं सवर्ण समाज दोनों को सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा। भाजपा नेतृत्व सवर्ण समाज को नये अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण कानून के बारे में पार्टी का पक्ष समझाने की कोशिश करेगा। कार्यकारिणी की केंद्रीय थीम में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वाजपेयी रहेंगे। पर बैठक का आयोजन दिल्ली में अबंडेकर प्रतिष्ठान में करके वह यह संदेश भी देगी कि उसके लिए अंबेडकर उतने ही महत्वपूर्ण है जितने दूसरे नेता।
बुधवार रात भाजपा नेतृत्व ने सवर्ण समाज के आंदोलन और उसके असर के बारे में गहन विचार मंथन किया था। मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली, प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद, स्मृति ईरानी आदि इसमें शामिल हुए थे। गुरुवार को सवर्ण समाज के कुछ संगठनों के भारत बंद के प्रभाव को भी पार्टी ने महसूस किया है और भाजपा नेतृत्व हर राज्य के हालात पर पैनी नजर रख रहा है। कई जगहों पर भाजपा के जिला एवं प्रदेश स्तरीय छोटे कार्यकर्ताओं के इस्तीफे ही भाजपा के लिए चिंता का सबब हैं। हालांकि भाजपा इस मुद्दे पर चुप रह कर संतुलन कायम करना चाहती है। पार्टी के एक वर्ग को लगता है कि सवर्णों का आंदोलन अंतत: उसके पक्ष में जाएगा क्योंकि इससे उसकी मुफ्त में ही दलित हितैषी छवि बन रही है। जबकि सवर्णों के पास भाजपा को वोट देने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कांग्रेस के कथित दुष्प्रचार खासकर राफेल के मुद्दे को लेकर सरकार पर आरोपों पर जवाबी हमले और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई की रणनीति पर विचार विमर्श के साथ ही इसे मुद्दा बना कर दलितों आदिवासियों में पैठ बनाने के लिए कार्यकर्ताओं काे तैयार रहने का आह्वान किया जाएगा।
बैठक में जिन अन्य विषयों पर कार्यवाही में इसमें पिछली कार्यकारिणी बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की जाएगी। पिछली बैठक से अब तक की प्रमुख गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी, संगठनात्मक विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा राजनीतिक एवं आर्थिक प्रस्तावों पर चर्चा होगी और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी। इसके अलावा भी अन्य कुछ विषयों पर भाजपा अध्यक्ष की अनुमति से चर्चा की जा सकती है।
सचिन अरुण
वार्ता
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