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स्वाती शाकम्भरी को 2018 का मैसाम युवा सम्मान

नयी दिल्ली, 09 सितम्बर (वार्ता) चालीस वर्ष से कम आयु के मैथिली साहित्यकारों के प्रोत्साहन के लिए प्रतिवर्ष दिया जाने वाला मैसाम युवा सम्मान इस वर्ष बिहार के समस्तीपुर जिला स्थित खानपुर की स्वाती शाकम्भरी को दिया गया है। उन्हें यह सम्मान रविवार को यहाँ चतुर्थ विद्यापति स्मारक व्याख्यानमाला के दौरान प्रदान किया गया।
श्रीमती शाकम्भरी को यह सम्मान उनके मैथिली कविता संग्रह 'पूर्वागमन' के लिए दिया गया है। उन्हें पुरस्कारस्वरूप 25 हजार रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इससे पहले प्रथम मैसाम युवा सम्मान चंदन कुमार झा को 'गामक सीमान पर' और द्वितीय वर्ष श्रीमती कामिनी चौधरी को 'खंड खंड बंटैत स्त्री' के लिए दिया गया था।
पुरस्कार प्राप्ति के बाद श्रीमती शाकम्भरी ने कहा, ‘‘मां, मातृभाषा और मातृभूमि की सेवा करने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफल हो सकता है। मुझे अपनी मातृभाषा में लिखकर बहुत सुखद अनुभूति मिलती है।” अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता श्री अरविंद मिश्र 'नीरज' को देते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में विशेष प्रतिभा होती है, जिसे बस निखारने की आवश्यकता होती है और उन्हें अपने पिता से यह विशेष आशीष मिला है।
स्वाती फिलहाल बी एन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में एम ए संस्कृत (अंतिम वर्ष) की छात्रा हैं। उनकी पहली कृति 'पूर्वागमन' साहित्य अकादमी से प्रकाशित है। उन्हें वर्ष 2017 में काका साहेब कालेलकर स्मृति युवा साहित्य सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इस दौरान प्रसिद्ध मैथिली साहित्यकार डॉ महेंद्र नारायण राम द्वारा ‘मैथिली लोक साहित्य आ दलित विमर्श’ विषय पर व्याख्यान भी दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. मंत्रेश्वर झा ने की।
सुरेश आशा
वार्ता
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