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भारत


टैगोर राष्ट्रवाद के विरोधी थे: इंद्रनाथ चौधरी

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (वार्ता) साहित्य अकादमी के पूर्व सचिव एवं प्रसिद्ध लेखक इंद्रनाथ चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि टैगोर राष्ट्रवाद के विरोधी थी और इसे वह एक स्वार्थी एवं संकीर्ण विचारधारा मानते थे बल्कि वह अंतर राष्ट्रीयतावाद के समर्थक थे।
श्री चौधरी ने यहां टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा टैगोर और गांधी पर व्याख्यान देते हुए यह विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टैगोर वैश्विक राष्ट्रवाद के समर्थक थे। उस दौर में राष्ट्रवाद बनाम मानवतावाद की बहस चली थी।
उन्होंने कहा कि टैगोर पहले स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थक नहीं थे क्योंकि वह पहले समाज में जाति प्रथा और कुरीतियों को दूर करने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि टैगोर की बात सही निकली। हम आजादी के बाद भी जाति प्रथा, कुरीतियों और भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं हो पाए।
उन्होंने गांधी और टैगोर के संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों में कई समानताएं थी तो कई असमानतायें भी थीं। दोनों जीवन भर अपने विचारों के कारण अकेले रहे। दोनों दो नदियों के समान थे। उन्होंने रोमा रोल्यां को उद्धृत करते हुए कहा कि टैगोर चरखा के विरोधी थे, क्योंकि वे उसमें कोई नया विचार नहीं मानते थे। महात्मा गांधी ने टैगोर से कहा था कि चरखा चलाकर तो देखिए, इस पर टैगोर ने उनसे कहा कि आप एक कविता लिखकर तो दिखाए।
उन्होंने कहा कि टैगोर को आशंका थी कि असहयोग आंदोलन हिंसक हो जाएगा लेकिन अपने एक भाषण में महात्मा गांधी को महानायक बताते लोगों से राष्ट्रपिता का सम्मान करने की लोगों से बात कही थी। समारोह में शांतिनिकेतन के प्रोफेसर सौरभ शुक्ला ने टैगोर के रवींद्र संगीत के बारे में विस्तार से बात की।
समारोह की अध्यक्षता ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखक रघुवीर चौधरी ने की।
अरविंद.उप्रेती.श्रवण
वार्ता
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