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भारत


निशंक ने चाइल्ड हेल्थ लिटरेसी कार्यक्रम का शुभारंभ किया

नयी दिल्ली, 03 नवंबर (वार्ता)केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भारतीय बाल रोग अकादमी, एसडी पब्लिक स्कूल तथा एएसजीएस ड्रीम बिग वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा शुरू किये गए 'चाइल्ड हेल्थ लिटरेसी प्रोग्राम' तथा 'चाइल्ड हेल्थ ब्रिगेड' का मंगलवार को शुभारंभ किया।
डॉ निशंक ने कहा, "शिक्षा और स्वास्थ्य दो ऐसे महत्वपूर्ण स्तंभ है जिन पर खुशहाल समाज निर्मित होता है। मुझे उम्मीद है कि इस कार्यक्रम की मदद से हमारे बच्चे समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा एक स्वस्थ शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा चाइल्ड टू चाइल्ड हेल्थ केयर की एक सुदृढ़ श्रृंखला की शुरुआत होगी।”
उन्होंने कहा," हम सब इस बात को भली-भांति समझते हैं कि शिक्षा में निवेश स्वास्थ्य में निवेश है। स्वास्थ्य और शिक्षा को एक साथ संबोधित कर हम सतत विकास लक्ष्यों को भी बहुत जल्द हासिल कर सकते हैं। ऐसे में हमारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 भी रोगों के देखभाल के बजाय स्वास्थ्य कल्याण तथा आरोग्यता पर जोर देती है ताकि सभी उम्र के लोग अच्छे स्वास्थ्य का लाभ उठा सकें। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए हमारा शिक्षा मंत्रालय भी शैक्षिक पाठ्यक्रम के एक हिस्से के रूप में शिक्षा स्वास्थ्य को शामिल करते हुए स्कूली स्वास्थ्य में निवेश पर जोर देता है।"
उन्होंने कहा "हमारे देश में 6 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के लगभग 26 करोड बच्चे स्कूलों में जा रहे हैं। ऐसे में इन बच्चों को शिक्षित करना, इनके स्वास्थ्य और व्यवहार के बारे में जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये स्वस्थ जीवन जी सकें और अपनी पूरी क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकें तभी एक शिक्षित, समृद्ध, उत्पादक और टिकाऊ समुदाय का भी निर्माण होगा।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसके द्वारा हम स्कूली बच्चों को वैज्ञानिक रूप से स्वास्थ्य शिक्षा देकर स्वास्थ्य के प्रति बच्चों की परिवार की तथा समाज की पारंपरिक सोच और रूढ़िवादी मानसिकता तक पहुंच सकते हैं तथा उनमें परिवर्तन भी कर सकते हैं और स्कूली बच्चे स्वयं स्कूल, घर या किसी भी स्थल पर चिकित्सकीय स्थिति का मूल्यांकन करने में सक्षम होंगे तथा प्रभावी कदम भी उठा सकेंगे। इसके अलावा बच्चे प्राथमिक उपचार के अपने कौशल से उन स्थानों पर जहां चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं है या आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य कर्मी तथा डॉक्टर के पहुंचने तक जीवन रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य में अपना योगदान दे सकेंगे।
डॉ़ निशंक ने कहा, "इस वैश्विक महामारी के दौर में हम सब जानते हैं कि स्वास्थ्य एक गंभीर मुद्दा बनकर उभरा है। ऐसे में शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा भावनात्मक एवं मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है हमें बच्चों को यह भी सिखाना है कि उन्हें मानसिक और भावनात्मक कठिनाइयों में कैसे अपने जीवन को संतुलित करना है।"
उन्होनें कहा, "निश्चित रूप से यह बच्चे ही स्वस्थ भारत के वास्तविक प्रतिनिधि बनेंगे और ऐसे अभियानों की मदद से स्वस्थ भारत शिक्षित भारत बनेगा, शिक्षित भारत समृद्ध भारत बनेगा और समृद्ध भारत ही आत्मनिर्भर भारत बनेगा और मुझे यकीन है कि यही आत्मनिर्भरता ही हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए श्रेष्ठ भारत के मार्ग को भी प्रशस्त करेगा।"
नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यह नीति भी शिक्षा के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल व उनके विकास पर जोर देती है। इस नीति के माध्यम से हेल्थ एजुकेशन से जुड़े स्नातकों की भूमिका में भी परिवर्तन की संकल्पना प्रस्तुत की गई है। अब हमारे हेल्थ ग्रेजुएट प्राथमिक एवं माध्यमिक अस्पतालों में भी कार्य करेंगे तथा निर्धारित मानदंडों के अनुसार नियमित रूप से स्वास्थ्य सुविधाओं और इनसे जुड़ी व्यवस्थाओं का मूल्यांकन भी करेंगे।"
इस कार्यक्रम में भारतीय बाल रोग के अध्यक्ष डॉ बकुल पारेख, निर्वाचित अध्यक्ष डॉ पीयूष गुप्ता, महासचिव डॉ बसव राज, इंडियन अकादमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स के दिल्ली केंद्र के अध्यक्ष डॉ रमेश नभ, सचिव डॉ स्मिता मिश्रा, एस डी पब्लिक स्कूल, पीतमपुरा, की प्रधानाचार्या अनीता शर्मा और स्कूल के चेयरमैन चंद्रभान गर्ग ने भी भाग लिया।
आजाद आशा
वार्ता
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