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रथयात्रा के मौके पर जगन्नाथपुरी बन जाती है मथुरा

रथयात्रा के मौके पर जगन्नाथपुरी बन जाती है मथुरा

मथुरा, 30 जून (वार्ता) रथयात्रा के दौरान कान्हा की नगरी  विभिन्न आयोजनों से जगन्नाथपुरी बन जाती है। मंदिरों में रथयात्रा निकालने की होड़ सी लग जाती है।

      वृन्दावन के कण कण में तो राधारानी का वास है इसलिए यहां पर स्वामी हरिदास से लेकर, गोपाल भट्ट स्वामी, सनातन गोस्वामी और यहां तक हरिदास पंजाबी तक जिस किसी ने ठाकुर की सच्चे मन से आराधना की, उसकी इच्छा जरूर पूरी हुयी।

     वृन्दावन का जगन्नाथ मंदिर भी ठाकुर की कृपा का प्रसाद है। इस मंदिर के इतिहास के बारे में मंदिर के महंत ज्ञान प्रकाश शर्मा ने बताया कि लगभग साढ़े 500 वर्ष पूर्व पंजाबी महात्मा भक्त हरिदास को यमुना तट पर स्वप्न में भगवान ने दर्शन दिए और कहा कि वे जगन्नाथपुरी जाएं और वहां से लाकर पहला विगृह यहां स्थापित करें। वे जगन्नाथ पुरी गए और वहां के राजा प्रताप रूद्र को भगवान का आदेश सुनाया तो राजा ने कहा कि वे विगृह नही दे सकते क्योंकिं जगन्नाथपुरी में तो विगृह को समुद्र में विसर्जन करने की परंपरा है।

     उन्होंने बताया कि इसके बाद जब राजा प्रताप रूद्र सोने गए तो भगवान ने उन्हें सपना देकर कहा कि यह भक्त उनकी आज्ञा से ही वृन्दावन से आया है तथा इसे विगृह दे दो । राजा के आदेश से वह महात्मा जगन्नाथ जी, सुभद्रा जी, बलभद्र जी एव चक्र सुदर्शन के विगृह लेकर वृन्दावन आए तथा जगन्नाथ घाट पर विगृह को स्थापित किया , जो बाद में भक्तों के सहयोग से मंदिर का रूप ले सका।

महंत शर्मा ने बताया कि चार जुलाई को शाम चार बजे मंदिर से तीन रथों में रथयात्रा निकलेगी जो नगर भ्रमणकर मंदिर में वापस आएगी। रथ यात्रा के साथ ही अन्य आकर्षक धार्मिक झांकियां भी निकाली जाएंगी। मंदिर में इस दिन छप्पन भोग और फूल बंगले के आयोजन के साथ भक्तों को दूध, आम, बूंदी के लड्डू, कचौड़ी आदि का प्रसाद वितरित होगा तथा अगले दिन समस्त ब्रजमंडल का झारा भंडारा होगा।

      वृन्दावन के बांकेबिहारी मंदिर में तो इस दिन ठाकुर जी चांदी के रथ में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य ब्रजेन्द्र गोस्वामी एवं ज्ञानेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि रथ यात्रा पर ठाकुर जी चांदी के रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। रथ को चारो ओर देशी विदेशी पुष्पों से सजाया जाएगा।उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े सात बजे से 12 बजे तक भक्तों को चांदी के रथ में ठाकुर जी के दर्शन होंगे तथा शयनभोग सेवा अधिकारी की अनुमति पर सायंकालीन सेवा में भी चांदी के रथ पर विराजमान बिहारी जी महराज के दर्शन होंगे।

     श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह के अनुसार मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शाम पांच बजे आकर्षक रथयात्रा निकाली जाएगी यहां पर रथ की संख्या एक ही होगी।रथ शहर के प्रमुख मार्गों से होकर वापस जन्मस्थान पर ही आएगा जहां पर भक्तों में प्रसाद वितरित किया जाएगा।

     भारत विख्यात द्वारकाधीश मंदिर के मुखिया ब्रजेश कुमार के अनुसार चार जुलाई को मंदिर के चौक में रथयात्रा के दर्शन की तीन झांकियां भक्तों को देखने को मिलेगी।जहां पहली झांकी दस बजे होगी वहीं दूसरी डेढ़ बजे और तीसरी साढ़े चार बजे होगी।

       वैसे रथ यात्रा विदेशी कृष्ण भक्तों द्वारा भी निकाली जाती हैं लेकिन उनकी रथयात्रा अलग समय में निकाली जाती है। कुल मिलाकर ब्रज के गोवर्धन जैसे अन्य धामों में कहीं मंदिर के अन्दर तो कहीं मंदिर के बाहर रथयात्रा का आयोजन इसी दिन हो जाता है तथा कन्हैया की नगरी जगन्नाथ नगरी बन जाती है।

सं प्रदीप

वार्ता

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