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राज्य » मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़


इस साल दायर प्रकरणों की उच्च न्यायालय में सुनवायी के निर्देश

जबलपुर, 17 अप्रैल (वार्ता) करोना वायरस के प्रकोप को मद्देनजर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लिया गया है कि इस साल दायर होने के वाले प्रकरणों की सुनवाई उच्च न्यायालय द्वारा की जायेगी। इस संबंध में उच्च न्यायालय के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार ने आदेश जारी किए हैं, जो उच्च न्यायालय की अधिकृत बेवसाइट पर अपलोड है।
मंगलवार की सुबह जारी किए गए आदेश के अनुसार अगामी 20 मार्च तक सिर्फ वर्ष 2020 में दायर प्रकरणों को उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवायी के लिए प्रस्तुत किया जाये। साल 2019 तथा उसके पूर्व में दायर प्रकरण की सुनवाई बढ़ाते हुए अप्रैल माह के दूसरे तथा मई माह के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की जाये। आदेश में पक्षकार एवं अधिवक्ता को यह स्वतंत्रता दी गयी है कि अर्जेन्ट मामलों की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष मैमो दायर कर सकते है।
इस दौरान फाइनल हियरिंग के प्रकरण उच्च न्यायालय में सुनवायी के लिए प्रस्तुत नहीं किये जाये। सोमवार को उच्च न्यायालय की फुल मीटिंग में निर्णय लिया गया था कि अगामी 20 मार्च तक सिर्फ अर्जेन्ट मामलों की सुनवाई मुख्यपीठ जबलपुर के अलावा इन्दौर और ग्वालियर खण्डपीठ में होगी। इसके अलावा उच्च न्यायालय ने जिला सत्र न्यायालयों तथा कुटुम्ब न्यायालय के लिए 17 बिंदुओं की एडवायजरी जारी की थी।
इसमें कहा गया था सभी अदालतें जब तक जरूरी न हो, तब तक उभय पक्षों की उपस्थिति के लिए दवाब न बनाएं। साथ ही पक्षकारों और आम नागरिकों के प्रवेश को नियंत्रित करने के प्रयास करें। सभी अधिवक्ता अपने पक्षकारों को तब तक न्यायालय में न बुलाएं, जब तक उनकी उपस्थिति जरूरी न हो। कोरोना वायरस से हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक किसी भी पक्ष की गैरहाजिरी पर उनके खिलाफ कोई आदेश पारित न किए जाएं।
पक्षकार, वकील या गवाह यदि पेशियां बढ़वाते हैं, तो उस पर विचार किया जाए। आपराधिक मामलों में आरोपियों की हाजिरी से छूट आदी के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गये थे। इसके अलावा उच्च न्यायालय में बायोमैट्रिक अटेण्डेंस के बजाये कर्मचारियों की हाजिरी रजिस्टर में उपस्थिति लगाने के आदेश भी जारी किए है।
सं बघेल
वार्ता
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