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देवास जिले के बाँस उत्पाद की पहुँच अब विदेशों तक

भोपाल, 24 अक्टूबर (वार्ता) मध्यप्रदेश के देवास जिले में बाँस से बनने वाले उत्पाद अब विदेशों तक पहुंच रहे हैं।
आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के रोडमेप में शामिल की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के तहत देवास जिले में बाँस से बनने वाले उत्पाद देवास में ही नहीं बल्कि देश और विदेश तक पहुँच रहे हैं। बाँस उत्पादों से जिले को अलग ही पहचान मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
देवास जिला प्रशासन ने नवरात्रि पर्व में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना में एक अनूठा नवाचार करते हुए यहाँ के प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक माँ चामुंडा मंदिर में दर्शन के लिए आए भक्तों को बाँस से बने डिब्बों में प्रसाद वितरित किया गया था। मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुअों ने इसकी सराहना भी की। माता की टेकरी पर अब बाँस के डिब्बों के उपयोग का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। बाँस से बने अन्य उत्पाद का प्रयोग घरेलू के साथ ही सौंदर्य प्रसाधनों में भी हो रहा है। बाजार में अच्छी मांग से रोजगार भी बढ़ रहा है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सभी जिले लोकल फॉर वोकल की दिशा में तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। हर जिले में स्थानीय तौर पर तैयार की जा रही सामग्रियों और उत्पादित विशेष फसलों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में देवास जिले में बाँस उत्पादन का चयन किया गया है। आर्टिजन कंपनी बाँस के विभिन्न उत्पाद बना रही है। इस कम्पनी का पहला प्रोसेस इंजीनियरिंग डेबू बोर्ड देवास में तीन वर्ष पहले स्थापित हुआ था। यहाँ तैयार हो रहे बाँस उत्पादों से बाँस उत्पादक किसानों को भी लाभ पहुँच रहा है। इमारती लकड़ियों में सबसे अच्छा प्रोडक्ट डेबू कटंग बाँस है, जो मध्यप्रदेश में पाया जाता है।
स्थानीय कटंग बाँस से वर्तमान में लिविंग रूम, शयन कक्ष, भोजन कक्ष और बाथरूम फर्नीचर, रसोई उत्पाद, फ्लैश और पैनल दरवाजे, रंग विकल्प सहित प्रमुख उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यहाँ तैयार फर्नीचर भारत के अलावा कई देशों में भी निर्यात किया जा रहा है। सामग्री तैयार होने के बाद अंत में शेष बचे बाँस के कचरे से बायो डीजल भी बनाया जा रहा है। स्थानीय महिलाएँ बताती हैं कि आधुनिक मशीनों के माध्यम से बाँस के डिब्बे सहित अन्य फर्नीचर का काम कर वे प्रतिमाह 10 से 15 हजार रूपये मासिक प्राप्त कर रही हैं।
विश्वकर्मा
वार्ता
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