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खरगोन में तनाव समाप्त करने में कारगर सिद्ध होंगे आगामी नगर निकाय चुनाव

खरगोन 17 जून (वार्ता) मध्यप्रदेश के खरगोन में रामनवमी के जुलूस के पथराव के उपरांत हुए अभूतपूर्व दंगों के बाद बने हुए तनाव को समाप्त करने की विभिन्न स्तर पर चल रही कोशिशों के बीच जिला कलेक्टर का मानना है कि नगर निकाय चुनाव की भी इसे समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
खरगोन में रामनवमी 10 अप्रैल के जुलूस के बाद व्यापक रूप से पथराव और आगजनी की घटनाएं हुई थी, जिसके चलते यहां करीब एक महीने तक कर्फ्यू लगाना पड़ा था। घटनाओं के चलते 75 केस दर्ज किए गए थे और अब तक लगभग 200 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कई घर पूर्ण रूप से तो कई आंशिक रूप से जलाए गए थे। इसके अलावा करीब 100 वाहनों को भी क्षति पहुंचाई गई थी। प्रदेश सरकार ने प्रभावितों को करीब 2 करोड रुपए की आर्थिक सहायता पहुंचाई थीए और विभिन्न माध्यमों से मरहम लगाने की कोशिश की थी।
खरगोन में जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा है, लेकिन आपसी सद्भाव और समन्वय का स्पष्ट अभाव अभी भी देखा जा रहा है। लोग दंगों के घाव को अभी भी नहीं भूल पाए हैं और सरकार और पुलिस व प्रशासन के प्रयासों के बीच अब सब कुछ समय पर छोड़ दिया गया है। विवाद की छोटी घटनाओं के मद्देनजर खरगोन जिला मुख्यालय पर शांति बनाए रखने के दो मोहल्लों के बीच दीवाल भी बनाई गई है और कुछ गलियों के लिए रास्तों को अस्थाई रूप से बंद किया गया है।
करीब एक महीने पूर्व खरगोन में पदस्थ हुए जिला कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम इस बात से सहमत हैं कि खरगोन जिला मुख्यालय पर हुए दंगों के चलते अभी भी हल्का तनाव बना हुआ है और लोगों का एक दूसरे पर भरोसा कायम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि आगामी नगर निकाय चुनाव शांति और समन्वय कायम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य प्रयासों के बीच नगर निकाय चुनाव निश्चित तौर पर इन तनाव को कम करने में बड़ी भूमिका अदा करेंगे, क्योंकि सभी दलों के प्रत्याशियों को हर वर्ग के वोटों की आवश्यकता पड़ेगी और वे एक दूसरे के पास जाकर अच्छे से पेश आएंगे।
उन्होंने दो मोहल्लों के बीच सीमेंट कंक्रीट की दीवाल बनाने को लेकर कहा कि मिश्रित जनसंख्या वाले खरगोन जिला मुख्यालय के खसखस वाड़ी और जमीदार मोहल्ले में आने-जाने के कई रास्ते हैं। क्षेत्र के नागरिकों की शिकायत थी कि युवा लोग तेज गति से दुपहिया वाहन चला कर आते हैं और हंगामा करते हैं, जिसके चलते तनाव होता है। अतः उक्त रास्ते में जाने को लेकर प्रतिबंध आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चूंकि दोनों मोहल्ले में आने जाने के और भी रास्ते थे, इसलिए विवाद वाले रास्ते पर एक दीवाल बना दी गई है। उन्होंने कहा कि इक्का-दुक्का लोगों के विरोध के अलावा इस दीवाल का किसी ने विरोध नहीं किया। इसके अलावा खरगोन के कुछ मोहल्लों की गलियों में अस्थाई बैरिकेडिंग की गई है, लेकिन एक दूसरे मोहल्लों में जाने के बड़े रास्ते खुले हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की रोकथाम के चलते तनाव की घटनाओं में कमी आई है और परिवर्तन देखने को मिला हैए तथा शांति स्थापित हो रही है।
जिला कलेक्टर ने बताया कि खरगोन में दंगों का पुराना इतिहास रहा है, लेकिन इस बार के दंगों अन्य दंगों से इसलिए अलग रहे, क्योंकि ज्यादातर विवाद और हिंसक घटनाएं सालों से साथ रह रहे पड़ोसियों के बीच हुई। उन्होंने कहा कि इन्हीं सब घटनाओं के चलते दीवाल और बैरिकेडिंग की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने कहा कि परिवार में भाइयों के बीच भी विवाद के बाद दीवाल बनने की स्थिति आती है। शहर में सद्भाव कायम रखने की चुनौती को देखते हुए हमारी प्राथमिकता दीवाल जैसे मुद्दों को छोड़कर फिलहाल शांति स्थापित करने की है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में एक मामूली सड़क दुर्घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश को तत्काल काबू किया गया। लोगों को समझाइश दी गई कि मिश्रित जनसंख्या के शहर में दो समुदायों के लोगों के टकराने की सम्भावना काफी होती है और इसका उद्देश्य हमेशा सांप्रदायिक नहीं होता। उन्होंने कहा कि खरगोन जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था को भी सुचारू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को कहा गया है कि किसी भी विवाद की स्थिति में इसे पुलिस व प्रशासन द्वारा दिए गए नंबरों पर सूचित करें ताकि ऐसी स्थिति में तत्काल कदम उठा कर स्थिति को संभाला जा सके। उन्होंने बताया कि दंगों के फौरी कारण कुछ भी रहे हो, लेकिन आमतौर पर दंगों के पीछे मूल रूप से अनैतिक गतिविधि संचालित करने वाले लोग होते हैं, जो घटनाओं के बाद रहनुमा बन जाते हैं। प्रशासन उन्हें चिन्हित कर उनकी अनैतिक गतिविधियों पर अंकुश लगा रहा है। दोनों पक्षों के सैकड़ों लोगों से शांति भंग न करने के लिए बंधपत्र लिए गए हैं। इसके मुताबिक लिखित वचन लिया गया है कि वे किसी भी प्रकार के विवाद या असामाजिक घटनाओं में हिस्सा नहीं लेंगे या उसे तूल नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि बंध पत्र का मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और घटनाओं में कमी आती है। दोनों पक्षों के अच्छे लाेगों के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने में मदद ली जा रही है।
खरगोन के पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि सभी मामलों की पारदर्शी विवेचना की जा रही है, ताकि किसी भी वर्ग को ऐसा न लगे कि उसके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि सीआरपीसी 41। के तहत संबंधितों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने को कहा है, ताकि उनके द्वारा प्रस्तुत सबूतों में यदि वे निर्दोष पाए जाते हैं, तो उन्हें पुलिस प्रकरणों से अलग किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आपसी सौहार्द और समन्वय के लिए मिली जुली आबादी के इलाकों में 10-10 युवा पुलिस मित्र बनाए गए हैं तथा वरिष्ठ लोगों को सद्भावना समिति में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि लगातार विश्वास निर्माण के प्रयास के चलते लोगों में सुरक्षा की भावना आ रही है और भय का वातावरण समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों पर कड़ी निगरानी रख कार्यवाही की जा रही है। इसके तहत 2 प्रकरण दर्ज किए गए हैं तथा 15 लोगों को नोटिस दिए गए हैं। पुलिस बल को ज्यादा अलर्ट कर एक्शन टाइम को कम किया गया है।
सं विश्वकर्मा
वार्ता
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